April 26, 2026

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जाति प्रमाण पत्र की अनुपलब्धता ने छीनी पढ़ाई की राह, मजदूरी करने को मजबूर छात्रा

पिथौरा। नगर के शासकीय कन्या स्कूल में स्टाफ की मनमानी से एक छात्रा पढऩे के बजाय मजदूरी करने विवश है। उक्त संबंध में स्कूल स्टाफ ने बताया कि जिनका जाति प्रमाण पत्र नहीं बना था, उन्हें नियमानुसार प्रवेश नहीं दिया गया है।

कक्षा आठवीं तक मिडिल स्कूल से पढ़ाई कर नगर के वार्ड क्र 8 की छात्रा ने आगे की पढ़ाई के लिए स्थानीय कन्या शाला में प्रवेश हेतु टीसी के साथ आवेदन किया था। छात्रा के अनुसार वह स्कूल जा रही थी परन्तु उसे कक्षा शिक्षक ने न तो सरकारी पुस्तक-कॉपी दी और न ही उनका नाम उपस्थिति पंजी में दर्ज ही किया।

वह प्रतिदिन अपना नाम उपस्थिति हेतु पुकारे नहीं जाने से अपमानित हो रही थी। छात्रा के अनुसार जब उसने इसका कारण कक्षा शिक्षक से पूछा तब उन्होंने बताया कि जाति प्रमाण पत्र नहीं बना है, इसलिए प्रवेश नहीं हो सकता। इसके बाद से उक्त छात्रा विद्यालय जाने से वंचित हो गई।

मामले की जानकारी मिलते ही ‘छत्तीसगढ़’ ने कन्या हाईस्कूल के प्राचार्य श्री बरिहा से सम्पर्क किया। इस पर उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए क्लास टीचर का मामला बताया। ‘छत्तीसगढ़’ ने जब शासन की कन्या योजना की बात की, तब प्राचार्य द्वारा ‘छत्तीसगढ़’ के अनुरोध पर बगैर प्रवेश कक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। छात्रा के पढऩे के जज्बे को देखते हुए एक अन्य शासकीय स्कूल के शिक्षक द्वारा छात्रा को पुस्तक-कॉपियां दी गई है।

उक्त छात्रा ने  ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि वह स्थानीय पुरानी बस्ती के वार्ड 8 में अपनी माँ एवं दो बहनों के साथ रहती हंंै। पिता कहीं बाहर रहते हैं। मां एवं बड़ी बहन मजदूरी कर दोनों छोटी बहनों को पढ़ाना चाहती है, परन्तु गरीबी के चलते वे अपनी बहनों का प्रवेश सरकारी स्कूल में भी नहीं करवा पाई। क्योंकि अशिक्षा के कारण छोटी बहन का आधार कार्ड नहीं बना था। क्योंकि आधार कार्ड बनवाने का एक आधार सेंटर वाले ने 1100 रुपये खर्च बताया और बड़ी बहन का जाति प्रमाण पत्र नहीं था। जिसके कारण दोनों पढ़ाई से वंचित हो रही थी। तब उन्हें उनके एक पड़ोसी ने  ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता के पास सहायता के लिए भेजा।

 ‘छत्तीसगढ़’ के प्रयास से छोटी बहन का प्रवेश पहली कक्षा में हो गया, परन्तु उससे बड़ी बहन का भविष्य कन्या हाईस्कूल के स्टाफ ने प्रवेश न देकर बर्बाद कर दिया।

ओपन परीक्षा की सलाह दी प्राचार्य ने

शासकीय कन्या हाई स्कूल के प्राचार्य ने उक्त छात्रा को प्रवेश तो नहीं दिया परन्तु यह सलाह दे दी कि अब वह ओपन परीक्षा में बैठ कर डिग्री ले सकती है।

पर, यह परिवार चाहता है कि उन्हें अन्य छात्राओं की तरह: विद्यालय में प्रवेश दिया जाए,  जिससे वह उत्साह से पढ़ाई कर अपना भविष्य बना सके।