सिंहासन योग जिसे अंग्रेजी में ‘लॉयन पोज’ के नाम से जाना जाता है, सबसे अनोखे योग आसन में से एक है. यह शायद एकमात्र ऐसा आसन है जिसमें ध्वनि बनाने की आवश्यकता होती है. संस्कृत शब्द सिंहासन दो शब्दों से लिया गया है. ‘सिंह’ का अर्थ ‘शेर’ और ‘आसन’ का अर्थ योग मुद्रा से है. सिंहासन योगासन के दौरान उत्पन्न होने वाली ध्वनि शेर की गर्जन ध्वनि के सामान होती है.
इस आसन को करने के लिए शरीर और चेहरे को शेर की तीव्र गर्जना की आवश्यकता होती है. इस आसन में एक अभ्यासी के चेहरे के भाव एक शेर से मिलते-जुलते हैं और इसे सिंह मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है. यह काफी आरामदायक आसन है जिसे कोई भी कर सकता है
ऐसे करें सिंहासन योग
- सिंहासन योग करने के लिए योगा मैट पर घुटनों के बीच दूरी बनाकर वज्रासन में बैठ जाएं.
- कमर को सीधा करके बैठ जाएं और दोनों हाथों को अपने घुटनों पर रखें.
- योग करते समय सांस पर विशेष ध्यान रखें और जीभ को अपनी क्षमता के अनुसार बाहर निकालने की कोशिश करें.
- सांस को छोड़ते हुए मुंह से ध्वनि से साथ जीभ को बाहर निकले.
- इस प्रक्रिया को कम से कम 4 बार दोहराएं.
- सिंहासन योग को खाली पेट किसी भी समय किया जा सकता है. हर रोज सुबह खाली पेट करना ज्यादा फायदेमंद होता है
फायदे
- सिंहासन योग एक एंटी एजिंग थेरेपी है जो चहरे से डबल चिन और झुर्रियां कम करने में मदद करता है.
- सिंहासन योग करने से चेहरा, आंखें, कान, जीभ, और गले से लेकर चेस्ट तक सभी को सही प्रकार से कार्य करने की क्षमता और सही ताकत मिलती है.
- सिंहासन योग करने से मेंटल स्ट्रेस कम होता है.
- जिन लोगों को हकलाने की समस्या है, सिंहासन उनके लिए लाभदायक है.
- बढ़ती उम्र में चेहरे की झुर्रियों को कम कर स्किन को टाइट रखने में मदद करता है.
- इस योग का हर रोज अभ्यास करने से गर्दन की मांसपेशियों को आराम और मजबूती मिलती है.

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