April 20, 2026

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इंडस्ट्रीज-सिंचाई में बिजली खपत बढ़ी, फिर कटौती की तैयारी

राजस्थान में फिर से बिजली कटौती शुरू होगी। दीपावली का त्योहार गुजरने के बाद फिर से बिजली की डिमांड बढ़ गई है। इंडस्ट्रीज और फैक्ट्रियां अब वापस खुल गई हैं। शहरों,गांवों, कस्बों में अपने-अपने घर-परिवार के साथ त्योहार की छुट्टियां बिताने गए कर्मचारी और लेबर फिर से काम पर लौटने लगे हैं। खेत-खलिहानों में भी नवंबर से फरवरी तक रबी का फसली सीजन आ गया है। इसलिए सिंचाई के लिए पम्प, ट्यूबवेल-मोटर चलाने के लिए बिजली की जरूरत पड़ने लगी है। रबी सीजन के दौरान बिजली की अधिकतम डिमांड 16500 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। घरेलू कनेक्शनों में भी पानी गर्म करने, नहाने-धोने के लिए पावर कंजम्पशन करने वाले गीजर का इस्तेमाल शुरू हो गया है। इसलिए बिजली डिस्कॉम ने त्योहारी सीजन के तुरंत बाद बिजली मैनेजमेंट की प्लानिंग शुरू कर दी है।

दीपावली के तुरंत बाद प्रतिदिन बिजली का पीक लोड करीब 12500 मेगावाट पहुंच गया है। जबकि बिजली की उपलब्धता करीब 10500 मेगावाट के बीच है। करीब 2000 मेगावाट बिजली अधिकतम डिमांड से कम है। बिजली कंपनियां घोषित-अघोषित रूप से फिर से नवंबर की शुरुआत से बिजली कटौती शुरु कर सकती हैं। गांव-कस्बों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी बिजली कटौती की शुरुआत की जा सकती है। अघोषित पावर कट, लोड शेडिंग और अनप्लांड शटडाउन के नाम पर 1 से 2 घंटे का पावर कट हो सकता है। दीपावली से दो दिन पहले तक मेंटीनेंस के नाम पर और अघोषित रूप से 4-4 घंटे की बिजली कटौती रोजाना अलग-अलग इलाकों में हो रही थी।

रबी फसली सीजन में बिजली की डिमांड 16500 मेगावाट तक पहुंच सकती है।

इंडस्ट्री और किसानों को बिजली देना प्राथमिकता

सूत्र बताते हैं कि इंडस्ट्री और किसानों को पूरी बिजली देना सरकार की प्राथमिकता है। अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। उससे पहले इन दोनों मजबूत वर्गों को नाराज नहीं किया जा सकता है। इंडस्ट्री से प्रोडक्शन बढ़ेगा और विकास होगा। आर्थिक हालात सुधरेंगे। किसान बड़ा वोट बैंक और अन्नदाता है। अर्थव्यवस्था में इनका भी बड़ा योगदान है। इस बार बारिश भी अच्छी हुई है बांध भरे हुए हैं। किसानों को सिंचाई के लिए पूरा पानी देना है। साथ ही जहां नहरी सिस्टम नहीं है, वहां ट्यूबवेल और पम्प के जरिए पानी सप्लाई दी जानी है।