April 25, 2026

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अल्जाइमर के रिस्क को कम करते हैं ये योगासन

अल्जाइमर एक ऐसा रोग है, जो व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। जब व्यक्ति इसकी जद में आ जाता है तो इससे ना केवल याद रखने की क्षमता प्रभावित होती है, बल्कि इससे निर्णय लेना भी काफी कठिन हो जाता है। साथ ही साथ, इससे व्यक्ति को अपने दैनिक कार्यों को भी सही तरह से करने में परेशानी होती है।

ऐसा माना जाता है कि बीपी, डायबिटीज या फिर सिर में चोट लग जाने के कारण अल्जाइमर की परेशानी हो सकती है। अमूमन इसे अधिक उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आज के लाइफस्टाइल के कारण कम उम्र में भी लोग इस समस्या से जूझने लगे हैं।

चूंकि इस बीमारी से पूरी तरह निजात नहीं पाई जा सकती है। लेकिन अगर आप सही तरीका अपनाते हैं तो इसे मैनेज किया जा सकता है। आप कुछ योगासनों की मदद से अल्जाइमर के रिस्क को कम कर सकती हैं और उसे मैनेज भी कर सकती हैं।

तो चलिए आज इस लेख में योगा विशेषज्ञ और वुमन हेल्थ रिसर्च फाउंडेशन की प्रेसिडेंट डॉ नेहा वशिष्ट कार्की आपको ऐसे ही कुछ आसनों के बारे में बता रही हैं, जो अल्जाइमर के रिस्क को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं- 

करें शीर्षासन

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अल्जाइमर के लिए शीर्षासन का अभ्यास करना काफी अच्छा माना जाता है। यह आसन ब्लड की सप्लाई को सिर की तरफ बढ़ा देता है। जिसके कारण व्यक्ति को शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस या फिर अल्जाइमर आदि का रिस्क काफी कम हो जाता है।

  • इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं। 
  • अब आगे की ओर झुकें और दोनों कोहनियों को जमीन पर टिकाएं।
  • इस दौरान आप अपने दोनों हाथों की उंगलियों को भी आपस में जोड़ लें और सिर को हथेलियों के मध्य रखें।
  • एक बार जब आप अपना सिर जमीन पर टिका लें तो धीरे-धीरे अपने शरीर को ऊपर की उठाना शुरू करें। 
  • अब आप अपने शरीर को सीधा कर लें। इस अवस्था में कुछ देर रूकें और फिर सामान्य स्थिति में लौट आएं।

भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम करने से ब्रेन सेल्स वाइब्रेट होता है और वहां से न्यूरो ट्रांसमीटर डोपामाइन को स्रावित करते हैं। जिससे व्यक्ति की मेंटल हेल्थ सुधरती है और अल्जाइमर का रिस्क काफी कम हो जाता है।

  • भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले आप सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं।
  • इस दौरान आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए और आंखें बंद रखें।
  • अब आप अपने दोनों अंगूठों की मदद से अपने कानों को बंद करें।
  • अब अपनी दो उंगलियों की मदद से आंखों को बंद करें और गहरी सांस लें।
  • सांस छोड़ते समय आप हम्म की आवाज निकालें।
  • ध्यान रखें कि आपका मुंह बंद होना चाहिए। जब आप मधुमक्खी की तरह आवाज निकालेंगे तो इससे आपको अपने मस्तिष्क सहित शरीर में कंपन महसूस होगा।
  • आप यथाशक्ति इसका अभ्यास कर सकती हैं।

उद्गीथ प्राणायाम

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उद्गीथ प्राणायाम भी आपको मानसिक रोगों से दूर रखने में मददगार साबित हो सकता है। आप उद्गीथ प्राणायाम के नियमित अभ्यास से अल्जाइमर के रिस्क को काफी हद तक कम कर सकती हैं। 

  • इस आसन का अभ्यास करने के लिए पद्मासन, सुखासन या सिद्धासन में बैठ जाएं। 
  • इस दौरान आपकी कमर सीधी होनी चाहिए, लेकिन अपने शरीर में तनाव को महसूस ना करें। 
  • दोनों हाथों से योग मुद्रा बनाएं।
  • अब अपनी आंखें बंद करें और गहरी सांस लें।
  • सांस लेते और छोड़ते हुए ओम् का उच्चारण करें।
  • आप इस प्रक्रिया को 5-11 बार दोहरा सकती हैं।

तो अब आप भी इन योगासनों का अभ्यास करें और अपनी मेंटल हेल्थ का बेहतर तरीके से ख्याल रखें।