रायपुर के सिलयारी क्षेत्र में दर्ज किशोरी से दुष्कर्म मामले में पुलिस जांच के दौरान लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब इस संवेदनशील मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने दुष्कर्म प्रकरण का फायदा उठाकर आरोपियों और उनके परिजनों को ब्लैकमेल करने तथा उनसे अवैध वसूली करने की साजिश रची थी।
पुलिस के अनुसार, मामले की विवेचना के दौरान पहले दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी, जिसके आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर अवैध वसूली, धमकी और ब्लैकमेलिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।
जांच में सामने आया ब्लैकमेलिंग का एंगल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की गहन जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ लोग दुष्कर्म प्रकरण को सार्वजनिक करने की धमकी देकर आरोपियों और उनके परिवारों से पैसे वसूलने का प्रयास कर रहे थे।
जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य
- आरोपियों को लगातार फोन कर धमकाया गया।
- मामले को सार्वजनिक करने की धमकी दी गई।
- आरोपियों के घर कई बार जाकर दबाव बनाया गया।
- नगद और डिजिटल माध्यम से रकम वसूले जाने के प्रमाण मिले।
- पीड़िता के दादा से भी लगातार संपर्क बनाए रखा गया।
पुलिस ने इन तथ्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच शुरू की थी।
दो और आरोपी गिरफ्तार
पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपी
- सूरज सिंह ठाकुर (35 वर्ष), निवासी ग्राम सिलयारी, धरसींवा, जिला रायपुर
- मोहम्मद उस्मान सैफी (36 वर्ष), निवासी ग्राम सिलयारी, धरसींवा, जिला रायपुर
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
कैसे रची गई थी वसूली की योजना?
विवेचना के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने दुष्कर्म प्रकरण में शामिल व्यक्तियों और उनके परिजनों को डराकर धन उगाही की योजना बनाई थी।
पुलिस जांच के अनुसार 28 मई 2026 को मोहम्मद उस्मान सैफी अपनी क्रेटा कार से अन्य लोगों के साथ आरोपियों के घर पहुंचा था। वहां कथित तौर पर परिवार के सदस्यों को यह कहकर डराया गया कि यदि उनकी मांग के अनुसार राशि नहीं दी गई तो पूरे मामले को सार्वजनिक कर दिया जाएगा और जेल भिजवाने की कार्रवाई कराई जाएगी।
जांच एजेंसियों को इस दौरान नगद और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मिले हैं।
पुलिस ने जोड़ी नई धाराएं
जांच में ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली के पर्याप्त प्रमाण मिलने के बाद पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) सहित अन्य प्रासंगिक धाराएं जोड़ी हैं।
पुलिस की कार्रवाई
- डिजिटल और कॉल रिकॉर्ड की जांच
- वित्तीय लेनदेन की पड़ताल
- आरोपियों के बीच संपर्क की पुष्टि
- ब्लैकमेलिंग से जुड़े साक्ष्यों का संग्रह
- न्यायिक रिमांड की कार्रवाई
संवेदनशील मामले में जारी है जांच
पुलिस का कहना है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार अभी भी कई तथ्यों की जांच जारी है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

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