September 4, 2026

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यूपी में ₹120 करोड़ की टोल टैक्स चोरी का खुलासा! मेरठ में टोल कारोबारियों पर ED की रेड, निजी सॉफ्टवेयर से चल रहा था बड़ा खेल

उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर करीब ₹120 करोड़ की टोल टैक्स चोरी से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मेरठ में टोल कारोबार से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की है। कार्रवाई के बाद टोल व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले निजी सॉफ्टवेयर और उसके जरिए की जा रही कथित हेराफेरी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि जांच का फोकस ऐसे सिस्टम पर है, जिसके जरिए टोल प्लाजा पर गुजरने वाले वाहनों के रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी की जाती थी।
मेरठ में टोल कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी

ED की कार्रवाई मेरठ में टोल कारोबार से जुड़े लोगों के घरों और अन्य ठिकानों पर हुई। जांच एजेंसी को कथित वित्तीय अनियमितताओं और टोल राजस्व में हेराफेरी से जुड़े अहम सुराग मिलने की बात सामने आई है।

छापेमारी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और कारोबारी लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच किए जाने की जानकारी है। हालांकि, मामले में जांच पूरी होने के बाद ही कथित गड़बड़ी की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
निजी सॉफ्टवेयर से कथित तौर पर होता था खेल

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा निजी सॉफ्टवेयर की हो रही है। आरोप है कि टोल प्लाजा की सामान्य प्रक्रिया से अलग एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके वाहनों से संबंधित जानकारी में कथित हेरफेर की जाती थी।

जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि सॉफ्टवेयर किस तरह काम करता था और उससे टोल राजस्व को किस प्रकार प्रभावित किया जा रहा था।

अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला टोल कलेक्शन सिस्टम की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
बिना FASTag वाले वाहन थे निशाने पर?

मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, कथित खेल में बिना FASTag वाले वाहनों पर खास ध्यान दिया जाता था। ऐसे वाहनों की टोल प्रक्रिया को लेकर कथित तौर पर सॉफ्टवेयर के जरिए गड़बड़ी किए जाने की आशंका है।

FASTag व्यवस्था का उद्देश्य टोल भुगतान को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। ऐसे में यदि किसी सिस्टम में छेड़छाड़ करके राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया है, तो जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि इसका असर कितने वाहनों और कितने समय तक रहा।
₹120 करोड़ की कथित टोल टैक्स चोरी

पूरे मामले में करीब ₹120 करोड़ की टोल टैक्स चोरी का आंकड़ा सामने आया है। यह रकम सामने आने के बाद जांच का दायरा काफी बड़ा माना जा रहा है।

जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम का वास्तविक नुकसान कितना हुआ, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और टोल कलेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड में किस स्तर पर बदलाव किया गया।

मामले से जुड़ी प्रमुख बातें:

मेरठ में टोल कारोबारियों से जुड़े ठिकानों पर ED की कार्रवाई।
करीब ₹120 करोड़ की कथित टोल टैक्स चोरी की जांच।
निजी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की बात सामने आई।
बिना FASTag वाले वाहनों पर कथित तौर पर फोकस।
डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच।
टोल राजस्व में कथित हेराफेरी के पहलू की पड़ताल।

जांच से खुल सकते हैं कई राज

ED की छापेमारी के बाद अब जांच में डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सॉफ्टवेयर से जुड़े डेटा, टोल प्लाजा के रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजों को मिलाकर जांच एजेंसी कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ सकती है।

जांच का एक अहम हिस्सा यह भी हो सकता है कि टोल प्लाजा पर दर्ज वाहनों की संख्या और वास्तविक राजस्व में कितना अंतर था।
टोल व्यवस्था पर भी उठे सवाल

यह मामला केवल कथित टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है। इससे टोल प्लाजा पर इस्तेमाल होने वाले डिजिटल सिस्टम की निगरानी और ऑडिट को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

देश में FASTag के जरिए टोल भुगतान को तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। ऐसे में किसी निजी सॉफ्टवेयर के जरिए कथित तौर पर सिस्टम में हेरफेर की बात सामने आना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण पहलू बन गया है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। ₹120 करोड़ की कथित टोल टैक्स चोरी का यह मामला कितना बड़ा नेटवर्क है, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगा।