August 31, 2026

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Gold Price: सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर! सरकार घटा सकती है इंपोर्ट ड्यूटी, क्या फिर सस्ता होगा गोल्ड?

नई दिल्ली। सोने और चांदी की ऊंची कीमतों के बीच खरीदारी करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकार सोने और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी यानी आयात शुल्क में कटौती के विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि, अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अगर सरकार शुल्क घटाती है, तो इसका असर घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

रत्न और आभूषण परिषद के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक, सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है। इंडस्ट्री का मानना है कि मौजूदा ऊंची आयात ड्यूटी से जिस तरह आयात को नियंत्रित करने की उम्मीद थी, वैसा असर नहीं दिखा। इसके बजाय अवैध कारोबार और ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिलने की चिंता बढ़ी है।

क्यों घट सकती है इंपोर्ट ड्यूटी?

सोने और चांदी पर ज्यादा आयात शुल्क लगाने के पीछे सरकार का उद्देश्य आयात को कम करना और देश के बाहरी खाते तथा विदेशी मुद्रा पर दबाव को नियंत्रित करना था। लेकिन ज्वेलरी इंडस्ट्री के मुताबिक, शुल्क बढ़ने के बावजूद सोने की मांग और आयात पूरी तरह नहीं रुका।

इसका एक दूसरा असर यह हुआ कि आधिकारिक चैनल और अवैध बाजार के बीच कीमतों का अंतर बढ़ने लगा। इंडस्ट्री का मानना है कि अगर आयात शुल्क को व्यावहारिक स्तर पर लाया जाता है, तो आधिकारिक कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।

इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती से क्या बदल सकता है?
आधिकारिक चैनल से सोने का आयात बढ़ सकता है।
ग्रे मार्केट पर दबाव कम होने की संभावना है।
ज्वेलरी कारोबार को राहत मिल सकती है।
घरेलू बाजार में कीमतों पर कुछ दबाव कम हो सकता है।
ग्राहकों के लिए सोना खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इंपोर्ट ड्यूटी घटने का मतलब सोने की कीमत में उतनी ही मात्रा में गिरावट होना जरूरी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव, डॉलर-रुपये की विनिमय दर, घरेलू मांग और अन्य टैक्स भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।

6% से बढ़ाकर 15% हुई थी ड्यूटी

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने मई में सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। यह फैसला विदेशी मुद्रा भंडार और देश के बाहरी खाते पर दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया था।

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात होता है। इसलिए आयात शुल्क में मामूली बदलाव भी घरेलू बुलियन और ज्वेलरी बाजार पर व्यापक असर डाल सकता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात मूल्य के लिहाज से करीब 24 प्रतिशत बढ़कर 71.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, इसी अवधि में आयात की मात्रा घटकर लगभग 721 टन रह गई।

सरकार कब करेगी फैसला?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकार आयात शुल्क घटाने का फैसला करती है तो यह कब और कितनी कटौती होगी। रत्न एवं आभूषण उद्योग की ओर से इस संबंध में मांग पहले से रखी जाती रही है।

राजेश रोकड़े के अनुसार, सरकार और इंडस्ट्री के बीच इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार किस तारीख को फैसला लेगी या आयात शुल्क में कितनी कमी की जाएगी।

इसलिए फिलहाल ग्राहकों को किसी निश्चित कीमत में गिरावट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इसे संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

आज सोने के भाव में भी गिरावट

इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती की खबर के बीच घरेलू वायदा बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कमजोर मांग के कारण सोने का भाव 2,045 रुपये गिरकर 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।

हालांकि, सोने की कीमतों में रोजाना होने वाला उतार-चढ़ाव कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करता है। सिर्फ इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित बदलाव को कीमतों में गिरावट का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

अगर आप शादी, निवेश या किसी अन्य जरूरत के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ संभावित इंपोर्ट ड्यूटी कटौती के आधार पर खरीदारी रोकना या तुरंत करना उचित नहीं होगा।

ध्यान रखने वाली प्रमुख बातें:

सरकार की ओर से अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगातार बदलती रहती है।
रुपये और डॉलर की चाल घरेलू कीमतों को प्रभावित करती है।
इंपोर्ट ड्यूटी घटने पर भी कीमत में उतनी ही गिरावट जरूरी नहीं है।
ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और अन्य लागत भी देखना जरूरी है।

कुल मिलाकर, सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए सरकार की संभावित इंपोर्ट ड्यूटी कटौती एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो सकती है। अगर शुल्क में कमी की जाती है, तो इससे आधिकारिक बाजार को राहत मिलने और ग्रे मार्केट पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है। वहीं आम ग्राहकों के लिए भी सोने की कीमत में कुछ राहत की संभावना बनेगी। लेकिन फिलहाल कोई अंतिम सरकारी फैसला नहीं हुआ है, इसलिए वास्तविक असर का पता आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा।