August 23, 2026

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400 फीट गहरी ब्लू वाटर खदान में 4 दिन से रेस्क्यू, शव अब भी लापता; AAP ने उठाए गंभीर सवाल, मांगा ₹50 लाख मुआवजा

रायपुर। नवा रायपुर के नकटी स्थित ब्लू वाटर खदान में डूबे युवक का शव चार दिन बाद भी बरामद नहीं हो सका है। करीब 400 फीट गहरी बताई जा रही इस खदान में लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिलने से प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय ने इस पूरे मामले को प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया है। उनका कहना है कि इतनी गहरी खदान में राहत और बचाव के लिए आधुनिक उपकरणों तथा विशेषज्ञ टीम की पर्याप्त व्यवस्था पहले से होनी चाहिए थी।

चार दिन बाद भी शव नहीं मिला

हादसे के बाद से बचाव दल लगातार युवक की तलाश में जुटा है। लेकिन खदान की गहराई और परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू टीम के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।

AAP नेता ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को खदान की गहराई और वहां पहले हो चुके हादसों की जानकारी थी, तो आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन पहले से क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए?

उन्होंने विशेष रूप से इन व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए:

  • डीप-डाइविंग के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ टीम।
  • आधुनिक गोताखोरी और रेस्क्यू उपकरण।
  • पर्याप्त सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था।
  • खदान के आसपास बैरिकेडिंग।
  • स्पष्ट चेतावनी बोर्ड।
  • आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की स्थायी व्यवस्था।

खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सूरज उपाध्याय का आरोप है कि ब्लू वाटर खदान में पहले भी हादसे होते रहे हैं, इसके बावजूद स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। उनका कहना है कि किसी खतरनाक और गहरी खदान को खुला छोड़ना लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

उन्होंने खदान के परमिशन और उसके क्लोजिंग से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि खदान बंद होने के बाद वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे।

माइनिंग इंस्पेक्टर और खदान मालिक की जवाबदेही तय करने की मांग

AAP ने इस हादसे में खदान मालिक और संबंधित माइनिंग इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यदि खदान में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ या खतरनाक स्थान को लोगों की पहुंच से दूर रखने के इंतजाम नहीं किए गए, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

उपाध्याय ने प्रशासन से यह भी सवाल किया कि यदि इलाके में पहले से गतिविधियां और लोगों की आवाजाही प्रशासन की नजर में थी, तो खदान के आसपास सुरक्षा इंतजाम समय रहते क्यों नहीं किए गए।

पूरे प्रदेश में सुरक्षा ऑडिट की मांग

AAP ने सिर्फ ब्लू वाटर खदान तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय प्रदेश की सभी गहरी खदानों और ऐसे जलाशयों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है।

पार्टी के मुताबिक खतरनाक स्थानों पर:

  • स्थायी बैरिकेडिंग की जाए।
  • चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
  • जरूरत के अनुसार सुरक्षा गार्ड तैनात हों।
  • नियमित निगरानी की व्यवस्था हो।
  • आपातकालीन रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध रखे जाएं।
  • पुराने और बंद पड़े खदान क्षेत्रों की भी जांच की जाए।

मृतक परिवार को ₹50 लाख मुआवजे की मांग

AAP ने हादसे में जान गंवाने वाले युवक के परिवार के लिए ₹50 लाख मुआवजे की मांग की है। पार्टी का कहना है कि हादसे के बाद केवल रेस्क्यू अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

चार दिन से जारी रेस्क्यू के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शव कब बरामद होगा और इस हादसे के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी। साथ ही, यह घटना एक बार फिर सामने ला रही है कि बंद या खतरनाक खदानों में सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी कितनी गंभीर साबित हो सकती है।

प्रशासन के सामने अब तत्काल रेस्क्यू पूरा करने के साथ-साथ हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच और भविष्य के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती है।