रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। परीक्षा शुरू होने से करीब एक घंटे पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और छात्रों के व्हाट्सऐप ग्रुपों में वायरल हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर दी और अब पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परीक्षा से पहले वायरल हुआ प्रश्नपत्र
गुरुवार, 20 अगस्त को सुबह 10 बजे बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष के छात्रों की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा होनी थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से लगभग एक घंटे पहले, सुबह करीब 9 बजे प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंची।
बताया गया कि डीन कार्यालय को ईमेल के जरिए प्रश्नपत्र के वायरल होने की जानकारी दी गई। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने वायरल पेपर की जांच कराई। जांच के दौरान सामने आया कि वायरल प्रश्नपत्र और वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र के करीब 70 प्रतिशत प्रश्न आपस में मिलते-जुलते थे।
इसके बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा को तत्काल निरस्त करने का फैसला लिया।
छात्रों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों को होता है, जो पूरी ईमानदारी और मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते हैं।
छात्रों ने प्रशासन से दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और परीक्षा दोबारा आयोजित कराने की मांग की।
मंत्री के निर्देश पर दर्ज हुई FIR
मामला सामने आने के बाद कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी संज्ञान लिया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए।
मंत्री के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने संबंधित कानूनों के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब मुख्य रूप से यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र आखिर किस स्तर से लीक हुआ और इसे परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही।
पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी मामले की आंतरिक जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। यह समिति प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी।
जांच के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की जांच।
- प्रश्नपत्र की छपाई और सुरक्षित रखने की व्यवस्था की पड़ताल।
- संबंधित कॉलेजों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की प्रक्रिया की जांच।
- परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा।
- वायरल प्रश्नपत्र और वास्तविक प्रश्नपत्र के बीच समानता की जांच।
- लीक की घटना में संभावित रूप से शामिल लोगों की भूमिका तय करना।
परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
IGKV में प्रश्नपत्रों की सेटिंग और छपाई विश्वविद्यालय स्तर पर ही की जाती है। इसके बाद प्रश्नपत्र संबंधित महाविद्यालयों और परीक्षा केंद्रों तक भेजे जाते हैं। ऐसे में जांच समिति के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरक्षित प्रक्रिया के बावजूद प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा।
पुलिस जांच के साथ विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच से भी इस सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद है।
जल्द घोषित होगी नई परीक्षा तिथि
परीक्षा रद्द होने के बाद अब छात्रों को नई तारीख का इंतजार है। कृषि मंत्री ने संकेत दिया है कि निरस्त परीक्षा की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों को समय रहते परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी देने की बात कही गई है।
प्रशासन का कहना है कि विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा की निष्पक्षता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रश्नपत्र लीक की घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि प्रश्नपत्र किस चरण में लीक हुआ और इसके पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका थी या नहीं।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल छात्रों की नजर पुलिस जांच, पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और नई परीक्षा तिथि की घोषणा पर है। आने वाले दिनों में जांच से पेपर लीक के स्रोत और इसमें शामिल लोगों को लेकर अहम जानकारी सामने आ सकती है।

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