रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की कमी दूर करने और स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े फैसलों की जानकारी दी है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और विभागीय सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने प्रेस वार्ता में विभाग की मौजूदा योजनाओं और आगामी तैयारियों का ब्यौरा साझा किया।
सबसे बड़ी घोषणा 5000 शिक्षकों की चरणबद्ध भर्ती को लेकर हुई है। विभाग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट को प्राथमिकता दी जाएगी।
5000 शिक्षकों की होगी चरणबद्ध भर्ती
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 5000 शिक्षकों की भर्ती चरणबद्ध तरीके से की जा रही है।
भर्ती की प्रक्रिया को अलग-अलग माध्यमों से पूरा किया जाएगा:
- नियमित पदों पर भर्ती कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होगी।
- संविदा पदों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित की जाएगी।
- चयन प्रक्रिया में मेरिट को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
- भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने पर जोर दिया जाएगा।
विभाग का कहना है कि CBT व्यवस्था लागू करने से संविदा भर्ती में प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हो सकेगी।
453 स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर
शिक्षा विभाग ने बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी की गई है। इसके जरिए 453 विभिन्न विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर किया गया है।
विभाग के अनुसार इस प्रक्रिया का उद्देश्य स्कूलों को बंद करना नहीं, बल्कि उपलब्ध शिक्षकों और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।
स्कूलों के एकीकरण और समायोजन के माध्यम से जहां शिक्षकों की जरूरत अधिक थी, वहां उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने की कोशिश की गई है।
पदोन्नति प्रक्रिया भी पूरी
प्रेस वार्ता में शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षक संवर्गों की पदोन्नति प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया गया है। इसके साथ ही विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्पेशल एजुकेटर के पदों पर भी भर्ती की गई है।
इससे स्कूलों में विद्यार्थियों की अलग-अलग शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र
शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 को लेकर भी बड़ा बदलाव बताया है। अब प्रदेश के सभी स्कूलों के लिए एक समान शैक्षणिक समय-सारिणी तैयार की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत नए शिक्षण सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल से होगी।
इससे पहले छत्तीसगढ़ में सामान्य तौर पर नया शैक्षणिक सत्र 15 जून के आसपास शुरू होता था। अब सत्र की शुरुआत पहले करने का फैसला शैक्षणिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित करने और स्कूल संचालन में एकरूपता लाने के उद्देश्य से किया गया है।
स्कूलों में एकरूपता पर जोर
विभाग का मानना है कि पूरे प्रदेश में एक समान शैक्षणिक कैलेंडर और समय-सारिणी होने से स्कूलों की गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल हैं:
- स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- जरूरत के अनुसार शिक्षकों का समायोजन करना।
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना।
- मेरिट आधारित चयन को प्राथमिकता देना।
- स्कूल संचालन में एकरूपता लाना।
- विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी
शिक्षा विभाग की प्रेस वार्ता में सामने आए फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार शिक्षकों की उपलब्धता, भर्ती प्रक्रिया और स्कूल संचालन व्यवस्था में बदलाव पर जोर दे रही है।
एक तरफ जहां 5000 शिक्षकों की चरणबद्ध भर्ती की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर युक्तियुक्तकरण के जरिए 453 स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने का दावा किया गया है।
अब शिक्षकों और अभ्यर्थियों की नजर भर्ती से जुड़े आगामी नोटिफिकेशन और परीक्षा कार्यक्रम पर रहेगी। वहीं नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल से किए जाने के फैसले का असर प्रदेश के सभी स्कूलों की वार्षिक शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ेगा।

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