August 10, 2026

खबरों पर नजर हर पहर

राशन दुकान से 50 लाख का चावल घोटाला, 1225 क्विंटल गायब; मशीन में अंगूठा लगवाकर बाद में देते थे राशन?

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सरकारी राशन व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। रायपुर ग्रामीण के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में स्थित एक शासकीय उचित मूल्य दुकान से 1225 क्विंटल सरकारी चावल की कमी पाई गई है। खाद्य विभाग ने गायब चावल की कीमत 50 लाख 9 हजार 956 रुपये निर्धारित की है। मामले में पुलिस ने महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष, विक्रेता और सहायक विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला ग्राम पंचायत सेरीखेड़ी स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान आईडी-442001044 का है। यह दुकान वर्ष 2024 से श्री राधा मोहन महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित की जा रही थी। खाद्य निरीक्षक देवेश देवदास ने कलेक्टर खाद्य शाखा के निर्देश पर मंदिर हसौद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

एफआईआर में समूह की अध्यक्ष माया यादव, विक्रेता अंजू यादव और सहायक विक्रेता हरिशंकर साहू को आरोपित बनाया गया है।

औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी गड़बड़ी

खाद्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 30 अक्टूबर 2025 को उचित मूल्य दुकान का औचक निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान कई हितग्राहियों ने दुकान के संचालन को लेकर शिकायत की।

हितग्राहियों के अनुसार, दुकान नियमित रूप से समय पर नहीं खुलती थी। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पहले मशीन में अंगूठा लगवाकर खाद्यान्न वितरण दर्ज कर दिया जाता था, जबकि वास्तविक चावल उन्हें तीन-चार दिन बाद दिया जाता था।

इसके बाद खाद्य विभाग ने दुकान के ऑनलाइन स्टॉक और मौके पर मौजूद भौतिक स्टॉक का मिलान किया। इस जांच में ही बड़ी विसंगति सामने आ गई।

ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1012.42 क्विंटल चावल उपलब्ध बताया गया था।
मौके पर जांच के दौरान केवल 35 क्विंटल चावल मिला।
पहली जांच में करीब 977.42 क्विंटल चावल की कमी पाई गई।

यानी रिकॉर्ड में जितना सरकारी चावल मौजूद दिखाया जा रहा था, उसके मुकाबले दुकान में वास्तविक स्टॉक बेहद कम मिला।

दूसरी जांच में 1225 क्विंटल चावल कम मिला

पहली जांच में अनियमितता सामने आने के बाद दुकान को अस्थायी रूप से दूसरी संस्था को सौंप दिया गया। इसके बाद खाद्य विभाग ने 23 नवंबर 2025 को दोबारा भौतिक सत्यापन कराया।

दूसरी जांच के दौरान ऑनलाइन स्टॉक, अलग-अलग सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध खाद्यान्न और संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया गया। इस विस्तृत सत्यापन में कुल 1225 क्विंटल चावल की कमी सामने आई।

खाद्य विभाग ने इस चावल का आर्थिक मूल्य 50,09,956 रुपये निर्धारित किया है। विभाग के मुताबिक, इतनी मात्रा में सरकारी खाद्यान्न की कमी से शासन को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ है।

नोटिस का भी नहीं दिया जवाब

जांच के बाद खाद्य विभाग ने संचालक संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। विभाग के अनुसार, नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। साथ ही कमी पाए गए चावल की भरपाई भी नहीं की गई।

इसके बाद कलेक्टर खाद्य शाखा के आदेश पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।

PDS नियमों के उल्लंघन का आरोप

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोगों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2016 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन किया। सरकारी खाद्यान्न के कथित गबन और आवश्यक वस्तु अधिनियम के उल्लंघन को लेकर पुलिस कार्रवाई की गई है।

मामले में पुलिस अब राशन दुकान से जुड़े दस्तावेज, ऑनलाइन एंट्री, खाद्यान्न आवंटन और हितग्राहियों को किए गए वितरण की जांच करेगी।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

मंदिर हसौद थाना पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ:

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4)
BNS की धारा 3(5)

के तहत अपराध दर्ज किया है।

अब इन बिंदुओं पर होगी जांच

पुलिस और खाद्य विभाग की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में इतना बड़ा अंतर कैसे पैदा हुआ।

जांच के प्रमुख बिंदु होंगे—

दुकान को कितना सरकारी चावल आवंटित हुआ था।
ऑनलाइन रिकॉर्ड में कितनी मात्रा दर्ज की गई।
वास्तविक रूप से कितने हितग्राहियों को चावल वितरित किया गया।
ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण और वास्तविक वितरण में कितना अंतर था।
कम पाए गए चावल का इस्तेमाल या निपटारा किस तरह किया गया।
मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 1225 क्विंटल सरकारी चावल की कमी और करीब 50 लाख रुपये के मूल्य का यह मामला सामने आने के बाद राशन वितरण व्यवस्था की निगरानी और रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।