August 10, 2026

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बंदूक छोड़ आत्मसम्मान की राह पर 50 युवा, सरकार ने मंजूर किए 70.68 लाख; 13 आत्मसमर्पितों को मिले 24.30 लाख के चेक

रायपुर। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के पुनर्वास की दिशा में नारायणपुर जिले में महत्वपूर्ण पहल की गई है। छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले 50 पूर्व कैडरों के लिए कुल 70 लाख 68 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मंजूर की गई है।

इसी क्रम में 7 अगस्त को 13 आत्मसमर्पित युवाओं को 24 लाख 30 हजार 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक ससम्मान वितरित किए गए। यह राशि उनके द्वारा आत्मसमर्पण के दौरान जमा किए गए हथियारों के एवज में स्वीकृत की गई है।

हिंसा छोड़ मुख्यधारा से जुड़ रहे युवा

नारायणपुर में आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास के लिए प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की नीति का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अवसर उपलब्ध कराना है।

पुनर्वास नीति के तहत पात्र लोगों को रोजगार, स्वरोजगार और वित्तीय सहायता जैसी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकें।

इस पहल का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें स्थायी रूप से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।

13 युवाओं को मिले 24.30 लाख रुपये

आत्मसमर्पित युवाओं के लिए आयोजित कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष और कलेक्टर ने 13 हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए।

कार्यक्रम की प्रमुख बातें:

कुल 50 आत्मसमर्पित पूर्व कैडरों के लिए राशि स्वीकृत।
कुल स्वीकृत प्रोत्साहन राशि 70.68 लाख रुपये।
पहले चरण में 13 युवाओं को राशि वितरित।
13 हितग्राहियों को कुल 24.30 लाख रुपये के चेक दिए गए।
राशि आत्मसमर्पित हथियारों के एवज में स्वीकृत की गई है।
शेष पात्र हितग्राहियों को भी नियमानुसार राशि देने की तैयारी है।
शांति और विकास ही जीवन की असली राह

कार्यक्रम के दौरान नारायणपुर कलेक्टर ने आत्मसमर्पित युवाओं का स्वागत करते हुए उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।

कलेक्टर ने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की राह चुनना क्षेत्र में शांति, खुशहाली और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण कदम है। आत्मसमर्पण के बाद युवाओं को नए अवसर मिलने से वे अपने और अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य तैयार कर सकते हैं।

प्रशासन की ओर से यह भी भरोसा दिलाया गया कि पुनर्वास नीति के तहत पात्र अन्य हितग्राहियों को भी जल्द ही नियमानुसार स्वीकृत राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर

पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि इन्हें केवल आर्थिक सहायता ही न मिले, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध हों।

इससे आत्मसमर्पित युवा अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकेंगे और समाज में सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे।

नारायणपुर में आत्मसमर्पित युवाओं के लिए उठाया गया यह कदम हिंसा से शांति और संघर्ष से विकास की ओर बढ़ते बदलाव का संकेत माना जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि पुनर्वास और आर्थिक सहायता के जरिए अधिक से अधिक भटके हुए युवा मुख्यधारा में लौटकर सुरक्षित और स्वावलंबी जीवन की ओर आगे बढ़ेंगे।