महतारी सदन बना महिला स्व-सहायता समूहों का नया केंद्र, बैठकों और आजीविका गतिविधियों को मिली नई रफ्तार
छत्तीसगढ़ में महिलाओं को संगठित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महतारी सदन एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रहा है। जशपुर जिले के केरसई में निर्मित महतारी सदन ने महिला स्व-सहायता समूहों को नियमित बैठकों, आजीविका गतिविधियों, प्रशिक्षण और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए एक स्थायी एवं सुरक्षित मंच उपलब्ध कराया है। इससे महिलाओं की सहभागिता बढ़ी है और समूहों का संचालन पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हुआ है।
महिला समूहों का कहना है कि अब उन्हें बैठक के लिए जगह तलाशने की परेशानी नहीं होती और वे अपने विकास से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से चर्चा कर पा रही हैं।
पहले बैठकों के लिए नहीं था स्थायी स्थान
केरसई की महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती बबीता गुप्ता ने बताया कि पहले समूह की बैठक आयोजित करना आसान नहीं था।
उन्हें अक्सर—
- किसी सदस्य के घर बैठक करनी पड़ती थी।
- कभी खुले मैदान या पेड़ के नीचे बैठना पड़ता था।
- बारिश और गर्मी के मौसम में बैठकें प्रभावित हो जाती थीं।
- कई बार सभी सदस्य एक साथ नहीं जुट पाती थीं।
इसका असर समूह की बचत, ऋण और अन्य गतिविधियों पर भी पड़ता था।
महतारी सदन बनने से बदली तस्वीर
महतारी सदन बनने के बाद महिला समूहों को एक स्थायी और सुविधाजनक स्थान मिल गया है।
अब यहां नियमित रूप से—
- स्व-सहायता समूह की बैठकें आयोजित होती हैं।
- बचत और ऋण संबंधी कार्यों की समीक्षा होती है।
- आजीविका गतिविधियों की योजना बनाई जाती है।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- सामाजिक और सामुदायिक विषयों पर चर्चा की जाती है।
महिलाओं का कहना है कि इससे समूह का संचालन अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हुआ है।
महिलाओं की सहभागिता में हुआ इजाफा
स्थायी भवन मिलने के बाद समूह की बैठकों में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है।
इसके प्रमुख लाभ—
- सभी सदस्य समय पर बैठक में शामिल हो पा रही हैं।
- निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई है।
- समूहों के बीच बेहतर समन्वय बना है।
- आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है।
- महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है।
महिलाओं ने जताया आभार
श्रीमती बबीता गुप्ता ने कहा कि महतारी सदन ने वर्षों से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान किया है। अब बैठक के लिए अलग-अलग स्थान तलाशने की आवश्यकता नहीं पड़ती और समूह की गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के संचालित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह भवन केवल बैठकों का स्थान नहीं, बल्कि महिलाओं को संगठित होकर आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का मजबूत माध्यम बन गया है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
महिला स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे समूहों को यदि स्थायी कार्यस्थल, प्रशिक्षण और सामुदायिक गतिविधियों के लिए उचित स्थान मिलता है, तो उनकी कार्यक्षमता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ती हैं।
महतारी सदन जैसी पहल महिलाओं को एक मंच पर लाकर उनके बीच सहयोग, नेतृत्व क्षमता और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक साबित हो सकती है।
सामुदायिक विकास को मिल रही नई दिशा
केरसई का महतारी सदन अब केवल एक भवन नहीं, बल्कि महिला स्व-सहायता समूहों के लिए संगठन, संवाद और आत्मनिर्भरता का केंद्र बन चुका है। नियमित बैठकों और आजीविका गतिविधियों के लिए स्थायी स्थान मिलने से महिलाओं को अपनी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने का अवसर मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर सामुदायिक सहभागिता मजबूत होने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण को भी नई गति मिल रही है।

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