धर्मनगरी वाराणसी में गंगा का जलस्तर फिलहाल स्थिर बना हुआ है, लेकिन बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। पिछले दिनों जलस्तर में हुई बढ़ोतरी के कारण कई घाट अब भी जलमग्न हैं और निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है। इसी वजह से जिला प्रशासन, जल पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों से सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील कर रहा है।
केंद्रीय जल आयोग ने जारी किए ताजा आंकड़े
केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के अनुसार, 24 जुलाई सुबह 8 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 61.05 मीटर दर्ज किया गया।
हालांकि यह स्तर अभी आधिकारिक चेतावनी स्तर और खतरे के निशान से नीचे है।
मुख्य आंकड़े:
- वर्तमान जलस्तर: 61.05 मीटर
- चेतावनी स्तर: 70.26 मीटर
- खतरे का निशान: 71.26 मीटर
इसके बावजूद पहले से बढ़े जलस्तर का असर घाटों और तटवर्ती क्षेत्रों में अब भी साफ दिखाई दे रहा है।
कई घाट और मंदिर अब भी जलमग्न
गंगा के बढ़े हुए जलस्तर के कारण वाराणसी के कई प्रमुख घाटों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है।
स्थिति की प्रमुख बातें:
- कई घाटों तक पहुंचने वाले रास्ते पानी में डूबे हुए हैं।
- तटवर्ती और निचले इलाकों में जलभराव बना हुआ है।
- घाट किनारे स्थित कई प्राचीन मंदिरों में पानी भर गया है।
- श्रद्धालुओं की आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
जलकुंभी बनी नौका संचालन में बाधा
गंगा के तेज बहाव के साथ बड़ी मात्रा में जलकुंभी भी नदी में बहकर आ रही है।
इसके कारण:
- नावों के संचालन में परेशानी हो रही है।
- कई स्थानों पर जलमार्ग प्रभावित हुए हैं।
- सुरक्षा कारणों से नाविकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
जल पुलिस और NDRF पूरी तरह सतर्क
जल पुलिस प्रभारी सुधीर त्रिपाठी के अनुसार, राजघाट से अस्सी घाट तक लगातार गश्त की जा रही है।
सुरक्षा के लिए उठाए गए प्रमुख कदम:
- जल पुलिस की लगातार निगरानी।
- NDRF की राहत एवं बचाव टीमें तैनात।
- मोटरबोट्स के जरिए नदी क्षेत्र में गश्त।
- आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत उपकरण तैयार।
प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है।
श्रद्धालुओं के लिए जारी की गई एडवाइजरी
घाटों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि:
- सुरक्षा बैरिकेड्स को पार न करें।
- गहरे पानी में स्नान करने से बचें।
- जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से परहेज करें।
- प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
भारी बारिश की आशंका से बढ़ी चिंता
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई है। यदि बारिश तेज होती है तो गंगा के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी हो सकती है।
इसी संभावना को देखते हुए:
- जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
- आपदा प्रबंधन विभाग को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
- स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी सतर्क हैं।
- जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली गई है।
फिलहाल गंगा का जलस्तर स्थिर है, लेकिन प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही से बचते हुए लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।

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