July 26, 2026

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छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण क्रांति: बच्चों के भोजन में मिलेट्स और स्थानीय खाद्य पदार्थों को मिलेगा बढ़ावा

आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण शिक्षा को नई दिशा, मिलेट्स और स्थानीय खाद्य संसाधनों से बच्चों को मिलेगा पौष्टिक आहार

छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों और माताओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए नई पहल कर रहा है। राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में अब स्थानीय खाद्य संसाधनों, मिलेट्स (मोटे अनाज) और पोषण वाटिका (न्यूट्री गार्डन) की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों के पूरक पोषण आहार को अधिक पौष्टिक, संतुलित और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री पर आधारित बनाना है।

इसी दिशा में दंतेवाड़ा जिले में ‘निरमान’ संस्था द्वारा डब्ल्यूएचएच (WHH) परियोजना के तहत आंगनबाड़ी सहायिकाओं के लिए प्रशिक्षक प्रशिक्षण (Training of Trainers – ToT) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

आंगनबाड़ी सहायिकाओं को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से दंतेवाड़ा जिले की आठ परियोजनाओं की आंगनबाड़ी सहायिकाओं को पोषण शिक्षा का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण में विशेष रूप से इन विषयों पर जोर दिया जा रहा है:

  • स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों का महत्व
  • मिलेट्स आधारित पौष्टिक और स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करना
  • बच्चों के लिए संतुलित पूरक पोषण आहार तैयार करने की विधि
  • पोषण संबंधी जागरूकता को समुदाय तक पहुंचाना

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को उनके क्षेत्र में उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

हर आंगनबाड़ी में विकसित होगी पोषण वाटिका

प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में पोषण वाटिका (न्यूट्री गार्डन) विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पोषण वाटिका के माध्यम से:

  • ताजी हरी सब्जियों की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • फलों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर होगा।
  • बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन मिलेगा।
  • पोषण शिक्षा को व्यवहारिक रूप दिया जा सकेगा।

इस पहल से आंगनबाड़ी केंद्र आत्मनिर्भर पोषण मॉडल की ओर बढ़ेंगे।

बारसूर के केंद्रों में लगाए गए फल और सब्जियों के पौधे

प्रशिक्षण के बाद ‘निरमान’ संस्था की टीम ने परियोजना अधिकारियों के सहयोग से दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों में पौधारोपण अभियान भी चलाया।

इस दौरान लगाए गए प्रमुख पौधे और फसलें:

  • पपीता
  • कटहल
  • अमरूद
  • सहजन (मोरिंगा)
  • भिंडी
  • लौकी
  • बरबटी
  • मक्का
  • कद्दू

इन पौधों और बीजों के माध्यम से भविष्य में केंद्रों को ताजे फल और सब्जियां उपलब्ध होंगी, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार की उम्मीद है।

अगले चरण में 30 से 40 केंद्रों तक पहुंचेगी योजना

महिला एवं बाल विकास विभाग और ‘निरमान’ संस्था की योजना है कि अगले चरण में बारसूर परियोजना के 30 से 40 आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पोषण वाटिकाएं विकसित की जाएं।

इससे अधिक बच्चों को स्थानीय स्तर पर तैयार पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी और पोषण शिक्षा को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सकेगा।

स्थानीय खाद्य संसाधनों से मिलेगा बेहतर पोषण

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय खाद्य पदार्थ और मिलेट्स पोषण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनका उपयोग बढ़ाने से बच्चों में कुपोषण की समस्या कम करने, संतुलित आहार उपलब्ध कराने और स्वस्थ विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की यह पहल न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण शिक्षा को नई दिशा देगी, बल्कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत बनाएगी।