July 27, 2026

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रक्षाबंधन पर रायगढ़ की अनोखी पहल! बीज राखी बांधेंगी दीदियां, मिट्टी में जाते ही उगेंगे पौधे

रायपुर। इस बार रक्षाबंधन का त्योहार केवल भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं बीज राखी तैयार कर एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। इन खास इको-फ्रेंडली राखियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि त्योहार के बाद इन्हें मिट्टी में डालने पर इनमें मौजूद देसी बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकते हैं।

जिला प्रशासन, जिला पंचायत रायगढ़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से शुरू किया गया यह अभियान अब पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का जनआंदोलन बनता जा रहा है।

बीज राखी से मिलेगा प्रकृति संरक्षण का संदेश

रक्षाबंधन पर लोग अपने भाई की कलाई पर राखी बांधते हैं, लेकिन इस बार रायगढ़ की महिलाएं पेड़ों को भी राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेने का संदेश दे रही हैं। साथ ही मिट्टी से बनी पर्यावरण-अनुकूल राखियों का उपयोग कर प्लास्टिक और अन्य गैर-जैविक सामग्री से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य त्योहार को प्रकृति से जोड़ना और लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

देसी बीजों से तैयार हो रही हैं खास राखियां

रायगढ़ जिले में तैयार की जा रही बीज राखियों में कई प्रकार के देसी बीजों का उपयोग किया जा रहा है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • धान
  • मक्का
  • भुट्टा
  • सेमी
  • करेला
  • बरबटी

त्योहार के बाद यदि ये राखियां मिट्टी में मिल जाती हैं या किसी खुले स्थान पर फेंकी जाती हैं, तो इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधे बन सकते हैं। इस तरह एक छोटी-सी राखी हरियाली बढ़ाने में योगदान दे सकती है।

गांव-गांव में महिलाओं का उत्साह

इस अभियान को लेकर रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की सदस्य कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार कर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की है।

इसके अलावा—

  • बैसपाली
  • जुनवानी
  • लोइंग
  • गोपालपुर
  • संबलपुरी
  • लैलूंगा
  • तमनार के लिबरा गांव (जननी समूह)
  • घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा (गायत्री समूह)
  • पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर

सहित जिले के अनेक गांवों की कृषि सखियां और महिला समूह इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

होगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी प्रतियोगिता

रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए रायगढ़ जिले के सभी सात विकासखंडों में सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा।

चयन के दौरान इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा—

  • राखी की आकर्षक डिजाइन
  • देसी बीजों का उपयोग
  • पर्यावरण संरक्षण का संदेश
  • नवाचार और रचनात्मकता

प्रत्येक विकासखंड से एक विजेता का चयन किया जाएगा।

विजेता दीदियां बांधेंगी अधिकारियों को राखी

प्रतियोगिता में चयनित सातों विजेता महिलाओं को 27 जुलाई को आयोजित विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

इस अवसर पर वे अपने हाथों से तैयार की गई बीज राखी जिले के कलेक्टर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को बांधेंगी। यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देने का माध्यम बनेगा।

क्यों खास है यह पहल?

बीज राखी अभियान कई कारणों से अनूठा माना जा रहा है—

  • रक्षाबंधन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना।
  • प्लास्टिक मुक्त और इको-फ्रेंडली राखियों को बढ़ावा देना।
  • देसी बीजों के संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का प्रयास।
  • स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल।
  • समाज में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश फैलाना।

पर्यावरण और संस्कृति का सुंदर संगम

रायगढ़ जिले की बीज राखी पहल यह संदेश देती है कि परंपराओं को निभाते हुए भी प्रकृति की रक्षा की जा सकती है। भाई-बहन के प्रेम के साथ यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाने या पेड़ों की सुरक्षा का संकल्प ले, तो रक्षाबंधन केवल रिश्तों का नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी पर्व बन सकता है। यह अनूठी पहल छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा बनने की क्षमता रखती है।