July 29, 2026

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धान छोड़ मूंगफली की खेती अपना रहे किसान, महासमुंद में 1000 हेक्टेयर में तिलहन फसल से बढ़ेगी आय

मूंगफली खेती

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। खरीफ सीजन में धान के स्थान पर कम लागत और अधिक लाभ वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है। इसी पहल का असर है कि जिले में करीब 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती की जा रही है।

कृषि विभाग का मानना है कि मूंगफली जैसी तिलहनी फसलें किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा देती हैं। कम पानी में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो रही है।

धान की जगह मूंगफली को बनाया विकल्प

महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड के ग्राम बोंदानवापाली के किसान फागू लाल कैवर्त और नंदकुमार कैवर्त ने धान की जगह मूंगफली की खेती अपनाकर नई पहल की है।

दोनों किसानों ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत:

  • 0.40-0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की बुवाई की।
  • 1 जुलाई 2026 को वैज्ञानिक विधि से फसल की शुरुआत की।
  • कृषि विभाग के मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया।

किसानों का कहना है कि मूंगफली की खेती में धान की तुलना में पानी की जरूरत कम होती है और लागत भी अपेक्षाकृत कम आती है।

कम पानी में ज्यादा लाभ की उम्मीद

किसान फागू लाल और नंदकुमार के अनुसार, बदलते मौसम और पानी की समस्या को देखते हुए वैकल्पिक फसलें अपनाना जरूरी हो गया है।

मूंगफली खेती के फायदे:

  • कम सिंचाई की आवश्यकता।
  • लागत में कमी।
  • तिलहन फसल होने के कारण बाजार में अच्छी मांग।
  • मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में सहायक।
  • किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर।

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मूंगफली जैसी फसलें किसानों को केवल आर्थिक लाभ ही नहीं देतीं, बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में भी मदद करती हैं।

फसल विविधीकरण पर कृषि विभाग का जोर

कृषि उपसंचालक एफआर कश्यप ने बताया कि जिले में किसानों को धान के अलावा दलहन, तिलहन और अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सरकार और कृषि विभाग का उद्देश्य है कि किसान केवल एक फसल पर निर्भर न रहें, बल्कि ऐसी फसलों को अपनाएं जिनसे:

  • आय में वृद्धि हो।
  • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो।
  • खेती जलवायु परिवर्तन के अनुसार अधिक अनुकूल बने।

अन्य किसानों के लिए बन रहा उदाहरण

बोंदानवापाली के किसानों द्वारा शुरू की गई मूंगफली की खेती अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक किसान धान के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाते हैं तो खेती का स्वरूप बदल सकता है।

मूंगफली उत्पादन बढ़ने से जिले में तिलहन फसलों को मजबूती मिलेगी और किसानों को बेहतर आर्थिक अवसर मिल सकते हैं। महासमुंद में शुरू हुआ यह बदलाव आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।