छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साही का अवैध शिकार करने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई महासमुंद जिले के बागबाहरा वन परिक्षेत्र में की गई, जहां आरक्षित वन क्षेत्र में साही के शिकार की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने त्वरित जांच शुरू की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वन विभाग लगातार अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों पर सख्ती से कार्रवाई कर रहा है।
आरक्षित वन में किया गया था साही का शिकार
वन विभाग को रैताल बीट के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक-154 में साही के शिकार की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वन परिक्षेत्र अधिकारी नवीन वर्मा के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
जांच के दौरान ग्राम नवाडीह (खम्हरिया) के पांच ग्रामीणों की संलिप्तता सामने आई। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने साही का शिकार करने के बाद उसका मांस आपस में बांट लिया था।
पांच आरोपी गिरफ्तार
वन विभाग ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
- गिरधारी गोंड
- लोकनाथ गोंड
- नागेश्वर गोंड
- सियाराम राजपूत
- नरसिंह कुमार
सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
वन विभाग ने इस मामले में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 22666/05 (13 जुलाई 2026) दर्ज किया है।
आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की निम्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है:
- धारा 2(16)
- धारा 9
- धारा 39
- धारा 50
- धारा 51
इन धाराओं के तहत वन्यजीवों का शिकार, अवैध कब्जा और संबंधित अपराध दंडनीय हैं।
वन विभाग की टीम ने निभाई अहम भूमिका
यह कार्रवाई वनमंडलाधिकारी मयंक पाण्डेय के मार्गदर्शन और उप वनमंडलाधिकारी गोविंद सिंह के नेतृत्व में की गई।
कार्रवाई में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, उनमें शामिल हैं:
- डिप्टी रेंजर नवीन शर्मा
- वनरक्षक डीलेश्वरी कंवर
- नीलकंठ दीवान
- वीरेंद्र दीवान
- वन विभाग का अन्य स्टाफ
इसके अलावा स्थानीय वन प्रबंधन समिति नवाडीह (खम्हरिया) के सदस्यों ने भी विभाग को सहयोग दिया।
वन विभाग की लोगों से अपील
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार, वन्यजीवों की तस्करी या किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
विभाग का कहना है कि वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार गश्त, निगरानी और विशेष अभियान जारी रहेंगे। वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। ऐसे मामलों में समय पर सूचना और जनसहयोग से जैव विविधता की रक्षा को और मजबूत बनाया जा सकता है।

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