बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड में धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भगवान को श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जाने वाले दान को लेकर उठे सवालों ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। मंदिर प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है, जबकि विपक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
2 जुलाई की बताई जा रही है घटना
मंदिर समिति के अनुसार चढ़ावे की कथित हेराफेरी की घटना 2 जुलाई की बताई जा रही है। इससे पहले 1 जून को चढ़ावा गणना स्थल और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों में लगभग 45 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है, जिससे जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की उम्मीद है।
मंदिर समिति का कहना है कि रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा गया है तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ पर सख्त रोक लगा दी गई है।
एक सप्ताह में आएगी जांच रिपोर्ट
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच समिति में शामिल अधिकारी:
- वित्त नियंत्रक
- विधि अधिकारी
- मुख्य प्रशासनिक अधिकारी
- वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
समिति चढ़ावा गणना से जुड़े कर्मचारियों, अधिकारियों और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
CCTV फुटेज पर टिकी जांच
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका नए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की मानी जा रही है। चूंकि कैमरे घटना से लगभग एक माह पहले लगाए गए थे, इसलिए जांच टीम संबंधित दिन की रिकॉर्डिंग का विस्तृत विश्लेषण कर रही है।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि—
- चढ़ावे की गणना के दौरान क्या हुआ?
- क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ?
- यदि कोई गड़बड़ी हुई तो उसमें कौन-कौन शामिल था?
कांग्रेस ने किया सत्याग्रह का ऐलान
मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो दोषियों तक पहुंचना मुश्किल होगा।
कांग्रेस ने 8 जुलाई को प्रदेशभर में उपवास और सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पंडा पंचायत ने भी जताई चिंता
श्री बदरीश पंडा पंचायत ने भी पूरे मामले पर चिंता व्यक्त की है। पंचायत का कहना है कि पिछले कुछ समय से सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं की खबरों से धाम की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
पंचायत ने मांग की है कि—
- दोषियों की निष्पक्ष जांच हो।
- जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
- यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान कार्रवाई की जाए।
- मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।
विपक्ष ने उठाई न्यायिक जांच की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) अथवा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त या वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
श्रद्धालुओं की नजर अब जांच रिपोर्ट पर
देश-विदेश से हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचते हैं और श्रद्धा के साथ दान अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की खबर ने लोगों की भावनाओं को प्रभावित किया है।
अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या हेराफेरी साबित होती है तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं, यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।

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