नकली मंगलसूत्र
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में नकली सोने के मंगलसूत्र के जरिए ज्वेलरी व्यवसायी से ठगी करने का मामला सामने आया है। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते दोनों आरोपी घटना के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिए गए। आरोपियों के कब्जे से ठगी की पूरी रकम और वारदात में इस्तेमाल की गई कार भी बरामद कर ली गई है।
पुलिस के अनुसार यह मामला नगर पंचायत पामगढ़ स्थित एक ज्वेलरी दुकान से जुड़ा है, जहां दो युवक सफेद रंग की कार में सवार होकर पहुंचे थे। दोनों ने खुद को जरूरतमंद बताते हुए तत्काल पैसों की आवश्यकता होने की बात कही और एक सोने का मंगलसूत्र गिरवी रखने का प्रस्ताव रखा।
खरीद बिल दिखाकर जीता भरोसा
दुकान संचालक ने जब आभूषण की खरीद संबंधी जानकारी और बिल मांगा तो आरोपियों में से एक युवक ने अपना नाम अमित तिवारी बताते हुए कथित खरीद रसीद पेश कर दी। दस्तावेज और बातचीत के आधार पर व्यवसायी को विश्वास हो गया कि मंगलसूत्र असली सोने का है।
विश्वास में आकर व्यवसायी ने मंगलसूत्र के बदले आरोपियों को 40 हजार रुपये दे दिए। रकम मिलने के बाद दोनों युवक तुरंत वहां से रवाना हो गए।
जांच में खुला नकली आभूषण का राज
कुछ समय बाद व्यवसायी को संदेह हुआ और उसने मंगलसूत्र की जांच कराई। जांच में पता चला कि जिस आभूषण को सोने का बताया गया था, वह वास्तव में बेनटेक्स से बना नकली मंगलसूत्र था।
ठगी का पता चलते ही व्यवसायी ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
पुलिस ने घंटों में सुलझाया मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम का गठन किया गया। जांच के दौरान साइबर सेल की मदद से आरोपियों की गतिविधियों और लोकेशन का पता लगाया गया।
तकनीकी साक्ष्यों और त्वरित कार्रवाई के आधार पर पुलिस ने बलौदाबाजार क्षेत्र में दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों से क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से—
- ठगी की पूरी 40 हजार रुपये की रकम
- वारदात में इस्तेमाल की गई सफेद बलेनो कार
- नकली मंगलसूत्र से जुड़े साक्ष्य
बरामद किए गए हैं।
व्यापारियों के लिए सीख
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि केवल दस्तावेजों या बिल के आधार पर कीमती आभूषणों का लेनदेन करना जोखिम भरा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार ज्वेलरी व्यवसायियों को—
- आभूषण की शुद्धता की तत्काल जांच करनी चाहिए।
- संदिग्ध ग्राहकों की पहचान संबंधी जानकारी दर्ज करनी चाहिए।
- बड़े लेनदेन के दौरान तकनीकी परीक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- सीसीटीवी और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से जहां व्यवसायी को राहत मिली है, वहीं यह कार्रवाई अपराधियों के लिए भी सख्त संदेश मानी जा रही है कि तकनीक और सतर्कता के दौर में अपराध कर बच निकलना आसान नहीं है।

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