July 30, 2026

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MLA ईश्वर साहू पर उठे सवाल: 1 करोड़ के 120 कंप्यूटर खरीदी मामले में कमीशनखोरी के आरोप, बिना मांग स्कूलों में भेजने का दावा

MLA ईश्वर साहू की विधायक निधि पर सवाल, 1 करोड़ के कंप्यूटर खरीदी मामले ने पकड़ा तूल

छत्तीसगढ़ में विधायक निधि के इस्तेमाल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। भाजपा विधायक ईश्वर साहू द्वारा करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से 120 कंप्यूटर सेट खरीदे जाने के मामले में सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि इन कंप्यूटरों की खरीदी स्कूलों की वास्तविक मांग के बिना ही कर ली गई और बाद में उन्हें अलग-अलग स्कूलों में भेज दिया गया।

मामले को लेकर विपक्ष और स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि विधायक निधि से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता की जरूरत होती है, लेकिन इस खरीदी प्रक्रिया में जरूरत और उपयोगिता को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

1 करोड़ रुपये की खरीदी पर क्यों उठे सवाल?

जानकारी के मुताबिक विधायक निधि से लगभग 120 कंप्यूटर सेट खरीदे गए। इनकी कुल लागत करीब 1 करोड़ रुपये बताई जा रही है। विवाद इस बात को लेकर है कि क्या संबंधित स्कूलों ने वास्तव में कंप्यूटर की मांग की थी या नहीं।

आरोप लगाने वालों का कहना है कि:

  • कई स्कूलों में कंप्यूटर की आवश्यकता का सर्वे नहीं कराया गया।
  • स्कूलों से मांग पत्र लिए बिना सामग्री भेज दी गई।
  • खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं।
  • इतनी बड़ी राशि खर्च करने से पहले उपयोगिता का आकलन जरूरी था।

स्कूलों को मिला सामान, लेकिन उपयोग पर सवाल

कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्कूलों में डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सभी स्कूलों में कंप्यूटर रखने के लिए जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं?

जानकारों के अनुसार कंप्यूटर उपलब्ध कराने के साथ-साथ इन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है:

  • बिजली और इंटरनेट की सुविधा।
  • कंप्यूटर चलाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक।
  • बच्चों की संख्या के अनुसार संसाधनों की जरूरत।
  • रखरखाव और सुरक्षा की व्यवस्था।

यदि इन पहलुओं को ध्यान में नहीं रखा गया तो महंगे उपकरण केवल कमरों में रखे रह जाने का खतरा रहता है।

कमीशनखोरी के आरोप, जांच की मांग

इस मामले में कुछ लोगों ने विधायक निधि के उपयोग पर सवाल उठाते हुए कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। हालांकि, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से इस मामले में सफाई आना बाकी है।

विरोधियों का कहना है कि विधायक निधि जनता के पैसे से आती है, इसलिए हर खर्च का हिसाब सार्वजनिक और पारदर्शी होना चाहिए।

उनकी मांग है कि:

  • कंप्यूटर खरीदी की पूरी प्रक्रिया की जांच हो।
  • टेंडर और भुगतान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
  • स्कूलों में कंप्यूटर के वास्तविक उपयोग की रिपोर्ट तैयार की जाए।

विधायक निधि के खर्च पर बढ़ती निगरानी

विधायक निधि से होने वाले कार्यों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास कार्यों में केवल पैसा खर्च करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उसका लाभ आम लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं।

शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल सुविधाएं निश्चित रूप से जरूरी हैं, लेकिन संसाधनों की खरीदी जरूरत के आधार पर होनी चाहिए। अब इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह जांच और संबंधित अधिकारियों के रुख पर निर्भर करेगा।

फिलहाल 120 कंप्यूटर सेट की खरीदी और उसके वितरण को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।