महासमुंद। महासमुंद में नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मामला नल कनेक्शन में मोटर पंप लगाने से जुड़ा है, जिस पर अब दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लग रहे हैं। एक तरफ जहां आम नागरिकों द्वारा नल कनेक्शन में मोटर पंप लगाने पर नगर पालिका कार्रवाई करती है, वहीं दूसरी ओर कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वयं नगर पालिका द्वारा मोटर पंप लगाकर पानी की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है।
क्या है पूरा मामला?
महासमुंद नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 80 हजार की आबादी निवास करती है। शहर के 30 वार्डों में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नगर पालिका द्वारा घर-घर नल कनेक्शन दिए गए हैं। इसके बदले नागरिकों से नियमित रूप से जलकर भी वसूला जाता है।
गर्मी के मौसम में अक्सर पानी की कमी की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे समय में कुछ लोग नल कनेक्शन में मोटर पंप लगाकर अधिक पानी खींच लेते हैं, जिससे आसपास के घरों में जलापूर्ति प्रभावित होती है। इसी कारण नगर पालिका समय-समय पर जांच अभियान चलाकर ऐसे मोटर पंप जब्त करती है और संबंधित लोगों पर कार्रवाई भी करती है।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
हाल ही में यह जानकारी सामने आई है कि शहर के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में नल कनेक्शन के साथ मोटर पंप लगाए गए हैं। स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का दावा है कि ये मोटर पंप नगर पालिका द्वारा ही लगाए गए हैं।
इस खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं—
- क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं?
- यदि मोटर पंप लगाना गलत है तो शासकीय संस्थानों को छूट क्यों?
- क्या नगर पालिका खुद अपने बनाए नियमों का उल्लंघन कर रही है?
- इस व्यवस्था से आसपास के क्षेत्रों की जलापूर्ति प्रभावित हो रही है या नहीं?
अधिकारियों ने क्या कहा?
मामले पर महिला एवं बाल विकास विभाग और नगर पालिका प्रशासन के अधिकारियों ने फिलहाल जानकारी नहीं होने की बात कही है।
अधिकारियों के अनुसार—
- मामले की जांच कराई जाएगी।
- तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे।
58 आंगनबाड़ी केंद्रों की होगी जांच?
नगर पालिका क्षेत्र में कुल 58 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। फिलहाल दो केंद्रों में मोटर पंप लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अन्य केंद्रों की स्थिति क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों का पालन करवाना है तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। जनता और सरकारी संस्थानों के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब पूरे मामले पर लोगों की नजर टिकी हुई है। शहरवासियों को उम्मीद है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वास्तविक तथ्यों को सामने लाकर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
यदि जांच में यह साबित होता है कि नगर पालिका ने ही आंगनबाड़ी केंद्रों में मोटर पंप लगवाए हैं, तो यह सवाल और भी गंभीर हो जाएगा कि आखिर जनता पर कार्रवाई और सरकारी संस्थानों को राहत देने का आधार क्या है?
फिलहाल यह मामला महासमुंद में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग निष्पक्ष जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।

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