MPPSC भर्ती में डिग्री को लेकर नया विवाद, छात्रों के भविष्य पर मंडराया संकट
मध्य प्रदेश में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से एमए करने वाले एक छात्र को केवल डिग्री के नाम में अंतर होने के कारण इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया।
छात्र का आरोप है कि उसने हिंदी विषय से पढ़ाई की, परीक्षा पास की और इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन डिग्री में “एमए हिंदी साहित्य” की जगह “एमए फंक्शनल हिंदी एंड लिटरेचर” लिखा होने के कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया।
इस फैसले के बाद कई अन्य छात्र भी चिंता में हैं, क्योंकि उनकी डिग्री में भी यही नाम दर्ज है।
क्या है पूरा मामला?
इंदौर निवासी ऋतिक गुप्ता ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला से एमए किया था। इसके बाद उन्होंने MPPSC द्वारा निकाली गई सहायक हिंदी प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में आवेदन किया।
उन्होंने:
- प्री परीक्षा पास की
- मेंस परीक्षा क्लियर की
- इंटरव्यू के लिए चयनित हुए
लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान आयोग ने उनकी डिग्री को अमान्य मान लिया।
कारण सिर्फ इतना था कि डिग्री में:
- “एमए हिंदी साहित्य” की जगह
- “एमए फंक्शनल हिंदी एंड लिटरेचर” लिखा हुआ था
विश्वविद्यालय ने डिग्री को बताया मान्य
मामले के बाद छात्र ने विश्वविद्यालय से संपर्क किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने MPPSC को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि यह डिग्री पूरी तरह मान्य है और हिंदी साहित्य से संबंधित ही है।
विश्वविद्यालय का कहना है:
- यह कोर्स पारंपरिक हिंदी से अधिक विस्तृत है
- इसमें हिंदी साहित्य और फंक्शनल हिंदी दोनों शामिल हैं
- डिग्री सभी संस्थानों में मान्य मानी जाती है
इसके बावजूद आयोग ने विश्वविद्यालय के पत्र को स्वीकार नहीं किया।
अन्य छात्र भी बढ़ी चिंता में
यह मामला अब सिर्फ एक छात्र तक सीमित नहीं रहा। हिंदी अध्ययनशाला के कई अन्य छात्र भी चिंतित हैं कि भविष्य में उनकी डिग्री को भी अमान्य घोषित किया जा सकता है।
छात्रों की मुख्य चिंताएं:
- भर्ती प्रक्रिया में अचानक अयोग्य घोषित होना
- वर्षों की पढ़ाई और तैयारी पर असर
- विभिन्न विभागों के अलग-अलग नियम
- भविष्य की सरकारी नौकरियों पर संकट
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
पीड़ित छात्र ऋतिक गुप्ता ने अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच में याचिका दायर की है।
उनके वकील अनिरुद्ध पटवा के अनुसार:
- विश्वविद्यालय ने डिग्री को मान्य माना है
- अब निर्णय उच्च शिक्षा विभाग और आयोग को लेना चाहिए
- यदि समय रहते स्पष्टता नहीं आई, तो कई छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है
फिलहाल मामले की सुनवाई होना बाकी है।
विश्वविद्यालय ने किसे ठहराया जिम्मेदार?
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रज्वल खरे ने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग और MPPSC पर डाली है।
उनका कहना है:
- विश्वविद्यालय द्वारा जारी डिग्री पूरी तरह वैध है
- आयोग को कोर्स की प्रकृति समझनी चाहिए
- विश्वविद्यालय पहले ही आधिकारिक पत्र जारी कर चुका है
उन्होंने यह भी कहा कि आखिर आयोग इस डिग्री को क्यों स्वीकार नहीं कर रहा, इसका जवाब आयोग को देना चाहिए।
शिक्षा और भर्ती व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने भर्ती प्रक्रिया और कोर्स मान्यता प्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- विश्वविद्यालय और भर्ती एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है
- कोर्स नाम और पात्रता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए
- छात्रों को प्रशासनिक भ्रम का नुकसान नहीं उठाना चाहिए

More Stories
तंबाकू छोड़ें, जीवन बचाएं! विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की बड़ी अपील
पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर में पत्रकारिता गौरव उत्सव में व्यक्त किया सम्मान
श्री गुरु अर्जुन देव जी की शहादत का अमर संदेश: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर गुरुद्वारा में श्रद्धांजलि अर्पित की