करोड़ों की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा..
महासमुंद – रायपुर // मोहम्मद इरफान शेख :
महासमुंद जिले में प्रशासनिक सिस्टम को हिला देने वाला LPG गैस चोरी वा गबन मामले की जांच जारी है। इसी तारतम्य में कल दोपहर से रात तक छापामार कार्यवाही जारी रही और गिरफ्तारियां हुई!
मामले में लगभग 90 मीट्रिक टन एलपीजी गैस की चोरी और कालाबाजारी कर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के माल की हेराफेरी हुई है। यह मामला सीधे police IG देख रहे हैं!
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर को गिरफ्तार कर लिया गया है।
ज्ञातव्य हो कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हैं। पुलिस की टीम दोनों की तलाश में छापेमारी अभियान चला रही है।ज्ञातव्य हो कि 23 दिसंबर 2025 रात्री में SDM अनुपमा आनंद के द्वारा पुलिस टीम के साथ एलपीजी से भरे 06 कैप्सूल ट्रकों को अवैध गैस refilling करते आधी रात को पकड़ा और कार्यवाही की, साथ ही दस्तावेज अधूरे होने के आधार पर जब्त किया था। सुरक्षा जोखिम को देखते हुए 30 मार्च 2026 को जिला प्रशासन ने इन ट्रकों को अभनपुर क्षेत्र के ग्राम उरला स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स प्लांट में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी।
खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में ट्रक प्लांट पहुंचे, लेकिन यहीं से घोटाले की पटकथा लिखी गई।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब्त ट्रकों का सुपुर्दगी के समय वजन तक नहीं कराया गया। सरायपाली से रायपुर के भनपूरी 200 किलोमीटर लंबे रास्ते में कई वजन पुलिया (धर्मकांटे) होने के बावजूद कोई वजन नहीं लिया गया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यही लापरवाही और कथित मिलीभगत घोटाले की नींव बनी थी। विभाग का अफ़सर जवाब दे कि, गैस कैसे चोरी हुई..??
प्लांट से थोड़ी दूरी पर खड़े किए गए ट्रकों से रात के अंधेरे में और दिन में भी गैस को बुलेट टैंकों में ट्रांसफर किया जाता रहा। जब प्लांट के टैंक भर गए तो गैस को निजी टैंकरों और सिलेंडरों में भरकर रायपुर समेत आसपास के इलाकों में सप्लाई कर दी गई। बिना वैध बिल के सिर्फ कच्चे चालान के सहारे 4 से 6 टन तक की खेपें भेजी गईं।
रिकॉर्ड जांच में बड़ा खुलासा हुआ —
कंपनी ने अप्रैल में सिर्फ 47 टन गैस खरीदी थी, लेकिन बिक्री रजिस्टर में 107 टन बेचने का दिखाया गया। यानी 60 टन गैस बिना किसी खरीद रिकॉर्ड के बाजार में पहुंच गई। विशेषज्ञों ने साफ कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में प्राकृतिक लीकेज असंभव है।
पुलिस ने GPS डेटा, बैंक ट्रांजेक्शन, परिवहन रिकॉर्ड, कंप्यूटर डेटा और स्टॉक रजिस्टर की गहन छानबीन की। इससे एक संगठित नेटवर्क का पता चला जो अवैध गैस की सप्लाई चला रहा था।अब तक 7 एलपीजी टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, करीब 100 गैस सिलेंडर, DVR, कंप्यूटर और अहम दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं।
कंपनी कर्मचारी निखिल वैष्णव की गिरफ्तारी के बाद खाद्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंच बनी।आरोपियों पर सबूत मिटाने की कोशिश का भी आरोप है। बिना बिल वाले रजिस्टर, एंट्री रजिस्टर और अन्य दस्तावेज गायब कर दिए गए थे। पुलिस अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की तैयारी कर रही है।
सिस्टम पर उठ रहे हैं सवाल..
यह घोटाला खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था, जब्त माल की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कुछ महीने पहले इसी विभाग ने फुटपाथ के छोटे व्यापारियों के सिलेंडर जब्त करने में सख्ती दिखाई थी। अब खुद विभाग के आला अधिकारी घोटाले में फंसे हैं, तो आम लोगों में आक्रोश है।
लोग पूछ रहे हैं —
छोटे आदमी पर तो कार्रवाई, बड़े घोटालेबाजों को कौन बचाता था?महासमुंद पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। यह मामला अब पूरे प्रदेश के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में शुमार हो चुका है।
पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। आगे की जांच रिपोर्ट आने वाली है।

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