April 20, 2026

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छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति में दवाओं का बड़ा गड़बड़झाला!

लापरवाह प्रबंधन की करतूत!

एक ही कर्मचारी को पिछले 9सालों तक बैठाने का नतीजा भुगतो!

22 लाख की दवाइयां एक्सपायरी, जबकि हकीकत में यह आंकड़ा कई गुणा अधिक!

ऑडिट करने वाले ऑडिटर को भी रखा धोखे में या कहे उसकी भी इसमें मिली भगत!

रायपुर/दि बीबीसी लाइव/इरफ़ान शेख़ :

छत्तीसगढ़ में एचआईवी एड्स से संक्रमित मरीजों के लिए राज्य शासन द्वारा स्थापित समिति में भारी अनियमितताएं देखने को मिली है।

आरटीआई से मिली जानकारी अनुसार ऑडिटर को भी धोखे में रखा गया। हमारे द्वारा अलग-अलग आरटीआई लगाने पर मामला प्रकाश में आया। जिससे बड़े फर्जीवाड़े का भी पता चलता है!
एक ओर जहां मरीजों को दवाइयां नहीं मिलती, वहीं लाखों की दवाइयां एक्सपायरी हो जाती है।
दवाइयां खरीदी में नियर एक्सपायरी का खेला तो बहुत पुराना है!

आपको बता दें की खरीदी कर, अति आवश्यक चीजों में hand gloves के साथ-साथ कॉन्डम condom जैसी चीजें भी लाखों की एक्सपायरी हुई है।

मिले दस्तावेजों के अनुसार एक्सपायरी Expiry लिस्ट कि जब ऑडिट हुई तो ऑडिटर को भी 2, 4 दवाइयों को ही बार बार दर्शाया गया, जबकि बाकी दवाइयों का इसमें उल्लेख ही नहीं।

आपको बता दें कि
छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति का गठन मध्यप्रदेश सोसायटी अधिनियम 1973 के अधीन वर्ष 2001 में पंजीकृत किया गया और मई 2002 में क्रियान्वित हुआ। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के दिशानिर्देष के अनुरूप एच.आई.वी. के नए संक्रमण पर रोकथाम तथा एच.आई.वी. के साथ जी रहे लोगों के लिए देखभाल एवं उपचार के कार्यक्रम सम्पादित किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में एचआईवी एड्स से संक्रमित मरीजों के लिए राज्य शासन द्वारा सीजीएसएएस का गठन किया गया।

राज्य में संक्रमित मरीज —

जानकारी अनुसार प्रदेश में लगभग 15,000 से अधिक एचआईवी/एड्स से संक्रमित मरीज है। जबकि प्रति वर्ष लगभग 2 से ढाई हजार मरीज राज्य में बढ़ रहे हैं।
विभाग के पास पेशेंट लिस्ट होने के बावजूद भी अधिक मात्रा में दवाओं का मंगाना और एक्सपायरी होना गंभीर सवालों को जन्म देता है।
जबकि कोरोना काल में कई दवाइयों का टोटा था, मरीज अपनी दवाओं के लिए दर-दर भटकने मजबूर थे!

जबकि मरीजों को उक्त दवाइयों के लिए केवल आश्वासन ही मिलता था।

उस समय भी मीडिया द्वारा अतिरिक्त परियोजना संचालक से बात करने पर उन्होंने अपना पल्ला झाड़ लिया था!

नियर एक्सपायरी दवाइयो का खेल —

जबकि आरटीआई से एक और अहम जानकारी सामने आई है कि दूसरे राज्यों से भी 2, 4 , 6 महीने के अंतराल की एक्सपायरी की दवाइयां मंगाई गई आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि केंद्र के साथ साथ अन्य राज्यों से भी दवाइयां मंगाई?
मंगाई यहां तक तो ठीक है, मगर नियर एक्सपायरी समझ से परे?
उसके बाद भी दवाइयां कालितित हो जाती हैं!
और वह भी लाखों की तादाद
में और लाखों की दवाई नियर एक्सपायरी की?? जिससे एक बड़ा भ्रष्टाचार होने से इनकार नहीं किया जा सकता!

ज्ञात हो कि प्रबंधन में जो अधिकारी हैं, एक जिम्मेदार पद पर बैठे हुए हैं, बावजूद इसके वे करीब 9 सालो से एक ही पद पर समिति में जमे हुए हैं और साथ ही ऐसे कई अधिकारी – कर्मचारी हैं जो की कुंडली मारे बैठे हुए हैं!

क्या 9साल कम होते हैं, बावजूद उनको अपने कार्य की क्या समझ नही??

बायो मेडिकल वेस्ट —

राज्य शासन द्वारा समय-समय पर बायो मेडिकल वेस्ट का निपटारा करने की गाइड लाइन जारी होती रहती है, जबकि प्राइवेट और छोटे -मोटे अस्पतालों के लिए भारी भरकम जुर्माना, नोटिस यहां तक की सील करने की कार्यवाही भी की जाती है, जबकि राज्य शासन का ही NACO पर आंखें क्यों मूंदी गई?

वर्ष 2012 से 2022 के बीच की एक्सपायरी दवा आज भी स्टोर में!

राज्य शासन द्वारा बायोमेडिकल वेस्ट को अलग-अलग संस्थान से अनुबंध कर डिस्पोज करती हैं, के बावजूद यहां स्टॉक करके रखा गया है जो कि पर्यावरण को नुकसान होने का भी अंदेशा है।
चौंकाने वाली बात है कि अब तक इस पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई?

क्या इन सब की जानकारी उच्च अधिकारियों को नही??