April 29, 2026

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सोनम रघुवंशी को जमानत कैसे मिली? मर्डर धारा पर पुलिस की बड़ी गलती ने पलटा मामला, कोर्ट ने खारिज की दलील

शिलॉन्ग: चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मंगलवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को शिलॉन्ग की अदालत से जमानत मिल गई। यह फैसला पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, और इसने पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब राजा रघुवंशी के परिवार ने इस फैसले के खिलाफ मेघालय हाई कोर्ट जाने की योजना बनाई है और सीबीआई जांच की मांग भी की है।

सोनम रघुवंशी को लगभग 11 महीने जेल में रहने के बाद यह जमानत मिली। अदालत ने मर्डर की धारा पर पुलिस की गलती को मानते हुए इस फैसले को सुनाया। अब यह मामला एक जटिल मोड़ ले चुका है, जो पुलिस की लापरवाही और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।

मर्डर की धारा पर पुलिस की गलती

राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी दस्तावेजों में मर्डर की गंभीर धारा (103(1) बीएनएस) लगाने की बजाय संपत्ति के बेईमानी से दुरुपयोग (403(1) बीएनएस) की धारा लगा दी। यह गलती केवल एक कागज तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर आधिकारिक दस्तावेज में इस गलती को दोहराया गया। पुलिस ने इसे साधारण लिपिकीय त्रुटि बताया, लेकिन अदालत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया

गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामियां

अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी मेमो, केस डायरी, निरीक्षण रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में भी गलत धाराएं दर्ज की गईं। इसके अलावा, गिरफ्तारी के कारणों से संबंधित फॉर्म में आवश्यक कॉलम भी खाली छोड़ दिए गए थे, जिसके कारण आरोपी सोनम को अपने खिलाफ लगे आरोपों की सही जानकारी नहीं मिल सकी। अदालत ने इसे संविधान के अधिकारों का उल्लंघन माना, क्योंकि किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले उसके अधिकारों और आरोपों के बारे में स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।

संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण बताना उसका मौलिक अधिकार है, और इस मामले में यह प्रक्रिया ठीक से नहीं अपनाई गई। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि जब गिरफ्तारी प्रक्रिया दोषपूर्ण होती है, तो जमानत दी जा सकती है। इस कारण जमानत की प्रक्रिया को न्यायपूर्ण ठहराया गया।

वकील की अनुपस्थिति और लंबी हिरासत

सोनम रघुवंशी के वकील की अनुपस्थिति और लंबी हिरासत भी जमानत देने के प्रमुख कारणों में से एक बनी। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पहली पेशी के समय सोनम के पास वकील मौजूद नहीं था, जिससे वह अपने कानूनी अधिकारों का तुरंत उपयोग नहीं कर सकी। इसके अलावा, सोनम जून 2025 से लगातार जेल में थी, और ट्रायल की प्रक्रिया भी धीमी रही। इन दोनों पहलुओं को अदालत ने जमानत देने का अहम आधार माना।

हनीमून से हत्या तक: मामला कैसे शुरू हुआ?

इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी ने 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से शादी की थी। इसके बाद, दोनों 20 मई को हनीमून के लिए मेघालय गए और 23 मई को आखिरी बार देखे गए। 2 जून 2025 को राजा का शव सोहरा के पास गहरी खाई में मिला, जिसमें तेज धार हथियार से हत्या की पुष्टि हुई। पुलिस के मुताबिक, सोनम का राज कुशवाहा नामक व्यक्ति से प्रेम संबंध था, और दोनों ने मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची। आरोप है कि राज और उसके दो साथियों ने मिलकर सोनम की मौजूदगी में राजा की हत्या की। इस मामले में कुल 8 आरोपी हैं और सितंबर 2025 में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी।