May 5, 2026

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RTE नियम तोड़ने वाले निजी स्कूलों पर बड़ा एक्शन: मान्यता रद्द करने की चेतावनी, सरकार सख्त

छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार को लेकर सरकार अब पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। RTE (Right to Education) Act 2009 के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में 25% आरक्षण देने के नियम का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।

क्या है RTE का प्रावधान?

RTE कानून के तहत:

  • निजी गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में 25% सीटें आरक्षित होती हैं
  • ये सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए होती हैं
  • प्रवेश बच्चों के निवास क्षेत्र के आधार पर दिया जाता है
  • यह कानून अप्रैल 2010 से लागू है

सरकार का उद्देश्य है कि हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।


स्कूलों को मिलती है प्रतिपूर्ति राशि

निजी स्कूलों को RTE के तहत प्रवेश देने पर सरकार द्वारा वित्तीय सहायता भी दी जाती है:

  • कक्षा 1 से 5 तक: ₹7000 प्रति छात्र
  • कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रति छात्र
  • भुगतान सरकारी स्कूल के खर्च या निजी स्कूल की फीस (जो कम हो) के आधार पर तय होता है

यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है ताकि स्कूलों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो।


अन्य राज्यों से तुलना

छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों से बेहतर या बराबरी की है:

  • मध्य प्रदेश: ₹4,419
  • बिहार: ₹6,569
  • झारखंड: ₹5,100
  • उत्तर प्रदेश: ₹5,400

हालांकि कुछ राज्यों में यह राशि अधिक है, लेकिन छत्तीसगढ़ का मॉडल संतुलित और व्यावहारिक माना जा रहा है।


कितने बच्चे उठा रहे लाभ?

  • कुल निजी विद्यालय: 6,862
  • लाभान्वित छात्र: 3,63,515+
  • इस वर्ष कक्षा 1 में लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश जारी

यह आंकड़े बताते हैं कि RTE योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है और हजारों बच्चों का भविष्य इससे संवर रहा है।


सरकार की सख्त चेतावनी

यदि कोई निजी स्कूल:

  • RTE के तहत प्रवेश देने से मना करता है
  • प्रक्रिया में बाधा डालता है
  • नियमों का उल्लंघन करता है

तो उसके खिलाफ:

  • कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई
  • मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई

की जाएगी।


महत्वपूर्ण अपील

शिक्षा विभाग ने अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है:

  • किसी भी अफवाह या गलत जानकारी पर ध्यान न दें
  • केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें
  • यदि कहीं नियमों का उल्लंघन दिखे, तो शिकायत जरूर करें