मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर क्राइम पुलिस ने शनिवार को एक बड़े डिजिटल फ्रॉड का खुलासा किया। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो ₹2.52 करोड़ की ठगी में शामिल थे। पुलिस ने बताया कि दिल्ली से गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों के साथ अब तक इस मामले में सात लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
90 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर को बनाया शिकार
साइबर अपराधियों ने अपने शिकार के रूप में एक रिटायर्ड एयर फोर्स रेडियोलॉजिस्ट, डॉक्टर नारायण महादेव को चुना। आरोपियों ने खुद को CBI ऑफिसर बताकर डॉक्टर महादेव को 27 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित की गतिविधियों पर नज़र रखी और उसे किसी से संपर्क करने से मना किया। अंततः, पीड़ित को ₹2.52 करोड़ की रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
ठगी की राशि कैसे वितरित हुई?
जांच में यह सामने आया कि ठगी की रकम पहले पांच बैंक खातों में ट्रांसफर की गई और फिर इसे 15 राज्यों के 300 से अधिक खातों में वितरित कर दिया गया। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार और कर्नाटका शामिल हैं। सबसे बड़ी राशि एक इंडसइंड बैंक के खाते में जमा हुई, जहां अकेले ₹28 लाख का लेन-देन हुआ।
आरोपी कैसे काम करते थे?
पूरे डिजिटल फ्रॉड के ऑपरेशन को मोबाइल ऐप टेलीग्राम के माध्यम से चलाया गया। आरोपियों ने नकली बैंक अकाउंट बनाए और उन्हें फ्रॉड नेटवर्क को ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में बेच दिया। इन म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने के लिए किया गया।
आरोपियों की गिरफ्तारी और जब्ती
पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और गहन जांच के बाद दिल्ली पहुंचकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से छह पासबुक, चेक बुक, ATM कार्ड और मोबाइल फोन जब्त किए गए। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे विभिन्न बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी कर रहे थे।
पहले से गिरफ्तार 4 आरोपी
इस मामले में पहले ही 1 मार्च को दिल्ली से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। इन आरोपियों ने भी इसी तरह के फ्रॉड नेटवर्क का संचालन किया था और पीड़ित को धोखे में रखकर पैसे ट्रांसफर करवाए थे। पुलिस के अनुसार, डॉक्टर महादेव को पहले दिल्ली, नोएडा, गुंटूर (आंध्र प्रदेश) और वाराणसी में मौजूद पांच अकाउंट्स में पैसे भेजने के लिए मजबूर किया गया था।
साइबर फ्रॉड की गंभीरता
यह मामला डिजिटल फ्रॉड की जटिलता और म्यूल अकाउंट नेटवर्क के गंभीरता को उजागर करता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि लोग इस तरह की धोखाधड़ी से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। इस प्रकार की ठगी में शामिल लोग इतने संगठित होते हैं कि वे मोबाइल एप्स और वर्चुअल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके पूरे ऑपरेशन को संचालित करते हैं।
आगे की जांच
ग्वालियर पुलिस ने बताया कि आरोपी अब कई और मामलों की जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह फ्रॉड नेटवर्क और कहां-कहां सक्रिय था। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी बैंक विवरण या डिजिटल लेनदेन को साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि जरूर करें।

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