इंदौर। सरकार द्वारा शासकीय अस्पतालों के लिए करोड़ों रुपए का बजट तय किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सम्मान के साथ भोजन तक नहीं मिल पा रहा है। शहर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में मरीजों को थाली के बजाय हाथों में रोटियां थमाई जा रही हैं और सब्जी प्लास्टिक के छोटे डब्बों में दी जा रही है। इसके कारण मरीजों और स्वजन को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में जिन मरीजों के पास खूद का डब्बा नहीं होता है, उन्हें तो सब्जी तक नहीं मिल पाती है। एमवाय अस्पताल, एमटीएच अस्पताल, कैंसर अस्पताल, चाचा नेहरू अस्पताल आदि में भर्ती गरीब और जरूरतमंद मरीज मजबूरी में इस व्यवस्था को झेल रहे हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा दावा किया जाता है कि मरीजों की अस्पतालों में बेहतर तरीके से देखभाल की जाती है।
बाहर से डब्बे लाने पर रोक, कैंटीन से खरीदने की अनुमति
मरीजों ने बताया कि उन्हें रोटियां सीधे हाथ में दे दी जाती हैं। सब्जी के लिए यदि बर्तन नहीं हो तो वह मिल ही नहीं पाती है। कुछ माह पहले एमवाय अस्पताल में हुए चूहाकांड के बाद प्रबंधन ने संक्रमण के डर से बाहरी बर्तन लाने पर रोक लगा दी है। लेकिन यह फैसला मरीजों पर ही भारी पड़ रहा है। अब मरीजों के स्वजन बाहर से थाली या डब्बे लेकर नहीं आ सकते। अस्पताल के मुख्य द्वार पर ही उन्हें रोक दिया जाता है। लेकिन वहीं दूसरी ओर अस्पताल परिसर के अंदर मौजूद कैंटीन से प्लास्टिक के डब्बे खरीदने की छूट दी गई है। ऐसे में दूर-दूर से आए मरीजों पर हर दिन अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
रोजाना खरीदना पड़ रहा डब्बा
धार जिले से आए मरीज के स्वजन ने बताया कि हम यहां इलाज के लिए आए हैं, लेकिन रोजाना डब्बा खरीदना भी एक खर्च बन गया है। मरीज को हाथ में रोटी देकर खाना खिलाना बहुत तकलीफ देता है। जिम्मेदारों को इसपर ध्यान देना चाहिए कि कम से कम मरीजों को थाली में तो खाना मिले। कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जिनके पास बर्तन नहीं उन्हें नहीं मिलेगा खाना
एमजीएम से जुड़े अस्पतालों में खजराना गणेश मंदिर ट्रस्ट द्वारा खाना वितरित किया जाता है। लेकिन सिर्फ उन्हीं मरीजों को खाना मिल पाता है, जिनके पास बर्तन होते हैं।
जिन मरीजों और स्वजन के पास बर्तन नहीं है, उन्हें खाना नहीं मिल पाता है। एसएसएच में मिल रही थाली एमजीएम मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में मरीजों को थाली की सुविधा दी जा रही है। यहां खाने से समय मरीजों को थाली मिलती है और उसे कर्मचारियों से ही धुलवाया जाता है। लेकिन अन्य अस्पतालों में यह सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं हो पाई है।
प्रदेश के अधिकांश अस्पतालों में यहीं स्थिति
सिर्फ इंदौर के ही शासकीय अस्पतालों में मरीजों को थाली नहीं दी जा रही है, बल्कि प्रदेश के अधिकांश शासकीय अस्पतालों में यहीं स्थिति है। प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने के दावें किए जाते हैं, नए अस्पतालों को खोलने की बात की जाती है। लेकिन अभी तक मरीजों को थाली ही नहीं दे पा रहे हैं।

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