मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और बागवानी से बना बहुआयामी आय का मॉडल
रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में किसानों को आधुनिक तकनीक और विविध आजीविका से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का प्रभाव जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा की सफलता में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिन्होंने अपनी मेहनत और नवाचार से खेती को नई दिशा दी है।


अंकित लकड़ा ने पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़ते हुए बहुआयामी कृषि मॉडल अपनाया है। पहले वे केवल वर्षा आधारित धान की खेती करते थे, लेकिन मत्स्य विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने अपने खेत में दो तालाबों का निर्माण कराया। इसके लिए उन्हें शासन से लगभग 8 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। साथ ही पॉन्ड लाइनर, मोटर, बोर और फीड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

उन्होंने तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए आधुनिक शेड तैयार किया है, जिसकी क्षमता 1000 से 1200 मुर्गियों की है। इस एकीकृत मॉडल में मुर्गियों का अपशिष्ट मछलियों के लिए आहार का कार्य करता है, जिससे लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि होती है।
तालाब के पानी का उपयोग कर अंकित बागवानी भी कर रहे हैं। उन्होंने तालाब के मेड़ों पर आम और लीची के पौधे लगाए हैं, जो न केवल अतिरिक्त आय का स्रोत बन रहे हैं, बल्कि मिट्टी के कटाव को भी रोकते हैं। गर्मी के मौसम में तालाब का पानी बागवानी के लिए उपयोग कर वे वर्षभर उत्पादन सुनिश्चित कर रहे हैं।
अंकित लकड़ा की यह सफलता दर्शाती है कि योजनाओं का सही उपयोग और नई तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। उनका यह मॉडल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
उल्लेखनीय है कि ऐसे ही नवाचारों और उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी के लिए 23 से 25 मार्च 2026 तक कृषि महाविद्यालय, कुनकुरी (जशपुर) में ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का आयोजन किया जा रहा है, जहां किसान नई संभावनाओं से जुड़ सकते हैं।

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