रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शंकर नगर इलाके में स्थित नैवेद्य स्वीट्स के खिलाफ प्रिंट रेट (MRP) से अधिक राशि वसूलने का मामला सामने आया है। इस संबंध में थाना सिविल लाइन में लिखित शिकायत देकर विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दुकान द्वारा उत्पादों पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक राशि लेकर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन किया गया। शिकायत के अनुसार, दिनांक 18 फरवरी 2026 को शिकायतकर्ता ने दुकान से 200-200 ग्राम के दो पैकेट- चाट पापड़ी एवं डायमंड सलोनी खरीदे। दोनों पैकेट पर अंकित MRP 70-70 रुपये था, जिससे कुल राशि 140 रुपये बनती थी। आरोप है कि दुकान द्वारा 145 रुपये का बिल जारी कर 5 रुपये अतिरिक्त वसूले गए। ग्राहक ने जब इस पर आपत्ति जताई, तो दुकानदार ने “सिस्टम अपडेट” का हवाला देते हुए इसे सही ठहराने का प्रयास किया, जिसे शिकायतकर्ता ने अनुचित और अस्वीकार्य बताया।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बिल एवं उत्पाद पैकेट के फोटो भी सौंपे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों में अंकित मूल्य और वसूली गई राशि के बीच अंतर स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पिछले कई महीनों से इस प्रकार ग्राहकों से अतिरिक्त राशि लेकर वसूली की जा रही है, जिससे यह मामला सुनियोजित उपभोक्ता ठगी जैसा प्रतीत होता है। शिकायत में संबंधित कृत्य को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318 (धोखाधड़ी), विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 तथा जीएसटी नियमों के संभावित उल्लंघन के तहत जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से FIR दर्ज कर दुकान के बिलिंग सिस्टम, स्टॉक रजिस्टर और पिछले एक वर्ष की बिक्री का रिकॉर्ड खंगालने का अनुरोध किया है।
साथ ही खाद्य विभाग, विधिक माप विज्ञान विभाग एवं जीएसटी विभाग को भी जांच में शामिल करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला केवल 5 रुपये तक सीमित नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के साथ संभावित आर्थिक ठगी का संकेत देता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे बड़ी संख्या में ग्राहकों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर कठोर कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ग्राहकों का शोषण रोका जा सके।इस मामले में पुलिस द्वारा शिकायत प्राप्त कर प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी मिली है। जांच के बाद ही तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, यह घटना उपभोक्ता अधिकारों और बाजार में पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है।

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