May 6, 2026

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राजिम मेला में कलाकारों की अनदेखी: खाने के लिए तरसे, MLA ने खुद ले जाकर खिलाया भोजन, धरने पर जनप्रतिनिधि

राजिम : आस्था और संस्कृति के महापर्व ‘राजिम कुंभ कल्प’ में इस बार भक्ति की बयार के साथ-साथ व्यवस्थाओं को लेकर भारी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है. मेले के आयोजन का जिम्मा संभाल रही इवेंट कंपनी की लगातार बढ़ती मनमानी और जिला प्रशासन की ढिलाई अब सरकार की छवि पर भारी पड़ने लगी है.
रविवार की रात राजिम कुंभ के मुख्य मंच पर छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कलाकार आरु साहू और उनके साथी कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी. लेकिन विडंबना देखिए कि मंच पर तालियां बटोरने वाले इन कलाकारों को कार्यक्रम के बाद डेढ़ घंटे तक भोजन के लिए इंतज़ार कराया गया. इवेंट कंपनी की घोर लापरवाही के चलते जब कलाकारों को खाना नसीब नहीं हुआ. तो इसकी खबर राजिम विधायक रोहित साहू तक पहुंची.
खबर मिलते ही विधायक रोहित साहू मौके पर पहुंचे और जिला प्रशासन व इवेंट कंपनी के प्रतिनिधियों की क्लास लगा दी. संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा: “राजिम कुंभ हमारी आस्था और प्रदेश की पहचान है. अगर कोई भी अधिकारी या इवेंट कंपनी सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश करेगी. तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा.
उन्होंने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को जमकर लताड़ते हुए पूछा कि आखिर किसके शह पर ये ठेकेदार बेलगाम हो चुके हैं? विधायक ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी भूखे कलाकारों को खुद साथ लिया और एक निजी रेस्टोरेंट ले जाकर उन्हें भोजन कराया.
इवेंट कंपनी की बदइंतजामी यहीं नहीं रुकी. सोमवार दोपहर से पुराने मेला स्थल पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और नगरवासी धरने पर बैठ गए. यह इस सीजन में दूसरी बार है. जब स्थानीय लोगों को विरोध के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है.
अस्वच्छता और बदबू: शौचालय और सफाई व्यवस्था का बुरा हाल, श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था न होना.. पत्रकारों और आम नागरिकों के साथ इवेंट कंपनी के कर्मचारियों का अभद्र व्यवहार..
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जब तक इवेंट कंपनी के कार्यों का भौतिक सत्यापन न हो जाए तब तक उन्हें एक रुपए का भी भुगतान न किया जाए.
राजिम कुंभ 2026 में आ रहे साधु-संतों और श्रद्धालुओं को हो रही असुविधा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ विधायक रोहित साहू का संवेदनशील रुख लोगों की तारीफ बटोर रहा है. तो दूसरी तरफ इवेंट कंपनी की ‘साहबगिरी’ ने मेले के आनंद को फीका कर दिया है.
कुंभ में इवेंट कंपनी के अनोखे रंग
कौन है परेशान?

कारण (व्यंग्य)
कलाकार

क्योंकि उन्हें कला के बदले अपमान और भूख का प्रसाद मिल रहा है।
पत्रकार

क्योंकि कंपनी के बाउंसर्स और कर्मचारियों को सच से एलर्जी है।
विधायक

क्योंकि प्रशासन ने आँखों पर इवेंट के चश्मे चढ़ा रखे हैं।
आम जनता

क्योंकि वे कुंभ देखने आए थे, कंपनी राज नहीं।

राजिम कुंभ में इस बार श्रद्धा की डुबकी लगे न लगे, लेकिन इवेंट कंपनी के बिछाए बाधाओं के जाल में जनता की डुबकी जरूर लग रही है. कंपनी के मैनेजमेंट गुरुओं ने मेला स्थल को किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा की तरह बेरिकेट्स से पाट दिया है. बिना किसी तर्क और जरुरत के जगह-जगह खड़े ये लोहे के अवरोध जनता को भक्ति मार्ग के बजाय भूल-भुलैया का अहसास करा रहे हैं. हालात ये हैं कि मुख्य मंच तक पहुंचना अब किसी दुर्गम पहाड़ी चढ़ने जैसा हो गया है. कई रास्तों को तो ऐसे ब्लॉक किया गया है जैसे वहाँ से गुजरने के लिए किसी वीजा की जरुरत हो. इवेंट कंपनी के इस अत्यधिक हस्तक्षेप ने मेले की रौनक को बेरिकेट्स के पीछे कैद कर दिया है. श्रद्धालु परेशान हैं. स्थानीय लोग हैरान हैं. और मुख्य मंच के सामने की खाली कुर्सियां इस अति-मैनेजमेंट की गवाही दे रही हैं. शायद कंपनी को लगता है कि जितने ज्यादा रास्ते बंद होंगे. उनका रुतबा उतना ही ज्यादा बढ़ेगा. भले ही जनता बेहाल हो जाए.