प्रशिक्षण के नाम पर खानापूर्ति .. बच्चों के भविष्य की चिंता किसे?
सरायपाली // अविनाश साहू :
शिक्षा में नियमित सुधार के लिए शासन प्रशासन द्वारा समय-समय पर विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन ब्लॉक, जिला व राज्य स्तर पर किया जाता है, परंतु उसे प्रशिक्षण का क्या अर्थ निकलेगा जब उसे क्षेत्र के शिक्षा की प्रशिक्षण में नदारद रहे एवं वहाँ की उपस्थिति पंजी में शिक्षकों के फर्जी सिग्नेचर चले..

पूरा मामला महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड का है जहां पर FLN प्रशिक्षण जोन – झिलमिला हाई स्कूल में प्रशिक्षार्थियों की संख्या 55 रही , परंतु वहां के हाजिरी रजिस्टर में 65 शिक्षकों का हस्ताक्षर पाया गया। प्रशिक्षण का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक का है.
क्या शिक्षकों की इस गंभीर लापरवाही का परिणाम बच्चों को भुगतना नहीं पड़ेगा?
शिक्षकों के मनमाने रवैया को किस अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है?
शिक्षकों की फर्जी उपस्थिति क्या वहां के ट्रेनरों द्वारा भरी जा रही है?
क्या इस पूरे मामले में प्रशिक्षण प्रभारी का भी हाथ है?

सवाल तो कई है… पर जवाब कुछ भी नहीं.
इस संबंध में जब विकासखंड सरायपाली के BEO टिकमचंद पटेल से पूछा गया तो उन्होंने नोटिस जारी करने, वेतन काटने और जांच की बात कही है एवं BRCC प्रभारी देवानंद नायक ने बताया कि अगर उपस्थिति नहीं है तो बहुत गलत है जांच की बात की है.
विद्या साहू – प्रशिक्षण अधिकारी से जब फोन के माध्यम से शाम को जानकारी मांगी गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की और कहा कि मुझे इस बारे मे कोई जानकारी नहीं और कहा कि मैंने रजिस्टर जमा कर दिया है.

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