महासमुंद। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत जिले में गुणवत्ताहीन खाद्य पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में खाद्य विश्लेषक की जांच रिपोर्ट में सुपारी का नमूना अवमानक (मानकों के अनुरूप नहीं) पाए जाने पर सुपारी संचालक और कंटेनर मालिक पर कुल 15 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। थाना प्रभारी सिंघोड़ा,
सरायपाली से प्राप्त सूचना के आधार पर 24 जनवरी 2025 को थाना सिंघोड़ा परिसर में एक ट्रक कंटेनर की जांच की गई। इस कार्रवाई का नेतृत्व खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई ने किया, जिनके साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम मौके पर मौजूद रही।
जांच के दौरान ट्रक कंटेनर में परिवहन की जा रही सुपारी का विधिक परीक्षण खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों के तहत किया गया। मौके पर ही प्रकरण तैयार किया गया। जांच में यह पाया गया कि खाद्य पदार्थ सुपारी के मालिक एवं ट्रक संचालक द्वारा कोई वैध खाद्य अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) प्रस्तुत नहीं की गई। नियमानुसार सुपारी का नमूना लेकर उसे गुणवत्ता परीक्षण के लिए खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया। प्रयोगशाला से प्राप्त खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में सुपारी का नमूना अवमानक घोषित किया गया, जो खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई द्वारा अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन से अभियोजन की स्वीकृति प्राप्त की गई और प्रकरण को अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एवं न्याय निर्णयन अधिकारी, महासमुंद के न्यायालय में विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई के पश्चात् सुपारी संचालक राजकमल सिंह, फर्म मेसर्स कमल इंटरप्राइजेस, कोलकाता को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 31(1) एवं 26(2)(पप) के उल्लंघन का दोषी पाया गया। इसके फलस्वरूप न्यायालय द्वारा धारा 51 एवं 63 के तहत कुल 15 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया। वहीं, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 31(1) के उल्लंघन के मामले में कंटेनर खाद्य परिवाहक के मालिक मुकेश साहनी को भी दोषी पाया गया। न्यायालय ने उन्हें धारा 63 के अंतर्गत 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। इस प्रकार इस प्रकरण में कुल 15 लाख 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि गुणवत्ताहीन खाद्य पदार्थों का विक्रय, परिवहन अथवा बिना खाद्य अनुज्ञप्ति एवं पंजीयन के खाद्य कारोबार करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत आगे भी निरंतर और कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम जनता को सुरक्षित और मानकयुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकें।

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