April 20, 2026

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कोंडागांव में भीषण सड़क हादसा: मसोरा टोल नाका के पास पांच की मौत

कोण्डागांव। नेशनल हाईवे 30 पर मसोरा टोल नाका के समीप बीती रात हुए भीषण सड़क हादसे में पाँच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा तब हुआ जब एक स्कॉर्पियो हाईवे पर खड़ी खराब ट्रक से जा भिड़ी। इस हादसे ने टोल प्लाज़ा प्रबंधन और एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

जानकारी के मुताबिक, खराब ट्रक कई घंटों से टोल परिसर से लगे मार्ग पर खड़ा था।

रात के अंधेरे में स्कॉर्पियो तेज़ रफ्तार से गुजर रही थी और खड़े ट्रक को देख नहीं सकी, जिससे जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि स्कॉर्पियो के परखच्चे उड़ गए और पाँचों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक बड़ेडोंगर गांव समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से बताए जा रहे हैं।

परिजनों और जनप्रतिनिधियों ने टोल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब टोल प्लाज़ा पर नियमित रूप से शुल्क लिया जाता है, तो बदले में सड़क सुरक्षा, गड्ढा-मुक्त मार्ग और आपातकालीन सेवाएँ मुहैया कराना भी प्रबंधन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद टोल नाका पर न तो क्रेन उपलब्ध है और न ही कोई अन्य राहत वाहन, जो ऐसे हादसों में त्वरित सहायता दे सके।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि क्रेन मौजूद होती, तो खराब ट्रक को समय पर हटाया जा सकता था और यह बड़ा हादसा टल सकता था। उन्होंने कहा कि सड़क की स्थिति भी अत्यंत खराब है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।

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टोल प्रबंधक आलोक पांडे ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने कई बार एनएचएआई से क्रेन सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, लेकिन अब तक इसकी व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने माना कि क्रेन होती तो हादसे को काफी हद तक रोका जा सकता था।

इस दर्दनाक दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और टोल प्रबंधन सहित एनएचएआई की जवाबदेही तय करने की मांग तेज़ हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार लापरवाही के कारण आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है और अब सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

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मृतक के परिजनों ने लगाया आरोप

उनका कहना है कि सड़क की स्थिति अत्यंत खराब है, गड्ढों से भरी है और टोल पर आपातकालीन राहत वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं। परिजनों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यदि टोल प्लाज़ा में क्रेन की सुविधा होती, तो खराब ट्रक को तुरंत हटाकर हादसे को रोका जा सकता था। उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब टोल प्रबंधन की लापरवाही के कारण लोगों की जान खतरे में आई है।