आखिर देश में चल क्या रहा है…??
बार बार नकली नकली आम जनता के सब्र का बांध अब टूट रहा है!
Black listed company से भी करोड़ों की खरीदी लगातार की जा रही है. System में बैठे लोग आपदा में अवसर तलाश रहे हैं और आम जनता के मौत के सौदागर बने बैठे हैं.
आम जनता से इन्हें कोई सरोकार नहीं और यही देश मे सबसे बड़ा आतंकवाद है!
भारतीय दवा बाजार एक लाख करोड़ से भी ज्यादा का हो चुका है
साथ ही वे आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे जो चोरी छिपे बनाए गए और खापाए गए दवा कि सटीक जानकारी नहीं है!
मध्यप्रदेश, राजस्थान , तमिलनाडु में
खांसी की दवा से दर्जनों बच्चों की हत्या हुई है, जिसकी रिपोर्ट सामने आई और ना जाने कितने बच्चे और मरे होंगे जिनकी रिपोर्ट सामने नहीं आ पाई है!
COLDRIF COUGH SYRUP बनाने वाली कंपनी श्रीसंस फार्मा की 19 दवाएं बैन की गई है. इसी कंपनी की सिरप से दर्जनों बच्चे मारे गए हैं. कार्यवाही के नाम पर 3 अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है जो नाकाफी है!
सबसे बड़ा दोषी है तो वह जिसने यह जहर बनाया उसके बाद वे अधिकारी जिनके जिम्मे जांच के बाद मार्केट में माल उतारना होता है. जिस batch number का माल मिला है जो Sub standard पाया गया है, उनमे 48.6 % formulation Diethynol पाया गया है जो प्रतिबंधित chemical है और उसकी खरीदी का company में कोई चालान दस्तावेज ही नहीं मिला है!!
जबकि यह मात्र 1 से 2% ही होना चाहिए. यह दवा को बनाने वाले pharmacist है या कोई और बंधवा मजदूर यह भी बड़ी जांच का विषय है? फिलहाल कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी है! मामले में SIT जांच दल गठित की गई है.
कफ सिरप मामले में बड़ा खुलासा हो रहा है जिसमें पता चला है कि कंपनी ने अवैध तरीके से खरीदा था 100 किलो जहरीला केमिकल Diethynol, जिसके बाद केंद्र की 12 सदस्यी जांच टीम आगे की कार्रवाई करेगी!
CDSCO दिल्ली जिसके अधीन सभी छोटी बड़ी फार्मा कंपनियां की जांच का जिम्मा होता है क्या उन्हें य़ह formulation का पता नहीं..??
नहीं तो वे तनख्वाह किस बात की ले रहे हैं, AC में बैठने के लिए..??
आपको यहां बताना जरूरी है कि
नकली और अवैध दवाओं से भरे 25 container सितंबर में नाइजीरिया सीमा से पकड़े गए हैं. यह कोई नया मामला नहीं है…!!
आपको याद होगा…
Africa ने अपने देश मे 66 बच्चों की मौत का जिम्मेदार भारतीय Company के बने cough syrup को दोषी ठहराया था
भारत सरकार ने भी जांच में आरोप सही पाया और कार्यवाही आगे बढ़ी, आगे एजेंसी ने क्या मामला अंजाम दिया होगा आम जनता बखूबी जनती है..??
इंदौर का नाम ले लेते हैं इसे दाव का central hub कहा जाता है, लेकिन यहां भी कुछ ऐसी कंपनियां भी है कि
आप मात्र 10 हज़ार खर्च कर कोई भी उत्पाद दवा बनवा सकते हैं और हमारा देश या कहें system ऐसा है की पता भी नहीं चलेगा और माल खाप जाएगा, कौन मारे जाएं किसी को परवाह नहीं??
उल्लेखनीय है कि
वर्ष 2011 में सांसद भवन में नकली दवा उत्पाद पर एक bill लाया गया था , जिसके तहत अगर कोई कंपनी या व्यक्ति भारत देश मे नकली दवा उत्पाद बनाया या बेचा तो कानून के तहत फांसी तक का प्रावधान होगा लेकिन bill आज भी धूल खा रहा है?
खैर मरने वाले मर गए परिवार इनका दुखी है और सदमा से वक़्त ही उभार पाएगा!!
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