धरमजयगढ़ ब्लॉक बरबसपुर के ग्रामीणों ने स्वामी जी को श्रद्धा सुमन अर्पित कर नाम आंखों से श्रद्धांजलि दी!
धरमजयगढ़/दि बीबीसी लाइव/असलम खान :
सदगुरुदेव स्वामी शारदानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने पर उनके शिष्यों के बीच शोक की लहर फैल गई मानो उन पर बज्रपात हो गया। महामंडलेश्वर स्वामी शारदा नंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने का समाचार गांव-गांव में फैले उनके शिष्यों तक दावानल की तरह फैल गया।सदगुरुदेव स्वामी का ग्रामीणों से इस कदर प्रेम था मानो राम और हनुमान का। स्वामी जी ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारने अपने स्तर पर अनेक कार्य किए जिसमें नशा मुक्ति अभियान के लिए अपने शिष्यों को प्रेरित करना गरीब कन्याओं का विवाह कराना उनका जीवन स्तर सुधारने के लिए अनेकों समाज सुधारक कार्य करना मुख्य उद्देश्य था।
कूड़ेकेला से लगभग 5 किलोमीटर दक्षिण में स्थित धर्मजयगढ़ विकासखंड के ग्राम बरबसपुर के पूरे ग्रामीण स्वामी जी के सानिध्य में आए और उनकी प्रेरणा से नशा मुक्ति में काफी हद तक निजात पाई एवं उनके अनुयायी बन गए जब भी देश प्रदेश में स्वामी जी का महामृत्युंजय जप या कोई भी कार्यक्रम होता था शोभायात्रा में अपने करमा दल नृत्य को लेकर सैकड़ों की संख्या में पहुंच जाते थे ।उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि गांव के एक एक व्यक्ति को नाम से संबोधित करते थे महिलाएं भी स्वामी जी की अनन्य भक्त थी। उनका मिलन भी स्वामी जी से शबरी और राम की तरह होता था ग्रामीणों के घर उनका बनाया हुआ ग्रामीण व्यंजन स्वामी जी बड़े चाव के साथ खाते थे एवं प्रसाद के रूप में वहां पर उपस्थित सभी भक्तों को वितरण करते थे उनके ब्रह्मलीन होने का समाचार सुनकर ग्रामीण स्तब्ध रह गए।क्योंकि अभी नवरात्रि में अंबिकापुर कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों की संख्या में पहुंचे बरबसपुर वासियों को स्वामी जी ने उनके गांव आने की बात कही थी, वैसे तो स्वामी जी बरबसपुर गांव में अनेकों बार आ चुके हैं, किंतु इस बार का नहीं आना ग्रामीणों के लिए बहुत दुख भरी खबर थी।
बरबसपुर के ग्रामीणों ने गांव में शोक सभा का आयोजन कर उन्हें अपने ग्रामीण स्तर पर सभी कार्यक्रम आयोजित किए एवं श्रद्धा सुमन अर्पित किए। ग्रामीणों के दिल में उनकी जगाई जोत हमेशा यादों के रूप में जलती रहेगी उनके बताए मार्ग पर चलते रहेंगे यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।उनके एक परम शिष्य लखन लाल राठिया ने अपना संस्मरण सुनाते हुए बताया कि हम जीवन में कभी सोचे भी नहीं थे जो ऐसा सतगुरु मिलेगा जो हमें सद मार्ग की ओर प्रेरित करेगा उनके एक परम शिष्य खरसिया के संटी सोनी ने उनका संस्मरण सुनाते हुए बताया कि उनका यह सातवां अवतरण था।
स्वामी जी ने बताया था कि मानव कल्याण के लिए अवतरण लेंगे।ऐसे महान सद्गुरु थे स्वामी शारदानंद सरस्वती जो वन वासियों के दिलों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ कर धरती से स्वर्ग लोक की ओर कूच कर गए।

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