August 2, 2026

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बाबा गुरु घासीदास जी की शोभा यात्रा, जयंती समारोह का आयोजन वा रैली निकाली गई!

दिनांक 18 दिसम्बर 2024 को रैली निकाल कर शांति अहिंसा का संदेश बाबा के अनुयायियों द्वारा नगर भ्रमण कर दिया गया. नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए रैली जयस्तम्भ चौक , पदमपुर रोड से बस स्टैंड होते हुए मंगल भवन को पहुची. सैकड़ों की तादाद में भक्तों ने बाइक, कार, वाहनों के माध्यम से रैली में सामिल हुए. 

समाज के अध्यक्ष (युवा) मुरलीधर बारीक वा प्रमुखों ने अगुवाई कर शांति का संदेश दिया.  

मुस्लिम समाज द्वारा ईदगाह मार्केट में स्टॉल लगा कर फूल माला से स्वागत किया और पानी चाय बिस्कुट खिला कर गले मिलकर सभी का स्वागत सत्कार किया. 

यह शांति संदेश रैली आज से प्रारंभ होकर 31 दिसम्बर 2024 तक यह जयंती समारोह पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश के हर गांव में जहां सतनामी समाज के लोग निवास करते है उस गांव में बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है. 

आपको बता दे कि बाबा गुरू घासीदास का जन्म 18 दिसम्बर सन् 1756 में बलौदाबाजार जिले के गिरौदपुरी में एक गरीब और साधारण परिवार में पैदा हुए थे।

उन्होंने सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया जिसका असर आज तक पूरे संत-समाज पर दिखाई पड रहा है, उनकी जयंती हर साल पूरे मान सम्मान के साथ छत्तीसगढ़ में 18 दिसम्बर को मनाया जाता है।

शिक्षाएँ और विश्वास बाबा गुरु घासीदास के अनुयायी जिन्हें सतनामी समाज के नाम से जाना जाता है,उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं l

बाबा गुरु घासीदास जी के सात प्रमुख शिक्षाए हैं-

1 सतनाम पर विश्वास रखना l

2 जाति-पाति के प्रपंच में नहीं पड़ना l

3 जीव हत्या नहीं करना l

4 मांसाहार नही करना l

5 चोरी,जुआ से दूर रहना l

6 नशा सेवन नहीं करना l

7 व्यभिचार नही करना l

बाबा गुरु घासीदास जी ने जातिवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य भर में यात्राए की है l ऐसा माना जाता है कि यह सतनामी समाज में पूजा करने,सत्य की खोज करने और समाज के लिए अच्छा करने की प्रेरणा जगाता है ।

बाबा गुरु घासीदास ने जाति-जाति के भेदभाव के खिलाफ प्रचार किया और अपने अनुयायियों से सभी व्यक्तियों के साथ सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करने का आग्रह किया l

शिक्षाएँ और विश्वास बाबा गुरु घासीदास के अनुयायी जिन्हें सतनामी समाज के नाम से जाना जाता है, उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं l