हिंदू धर्म में कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली मनाया जाता है। इस साल पंचांग भेद के कारण 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को दो दिन दिवाली मनाई जा रही है। दिवाली के शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-आराधना की जाती है। दिवाली के दिन सायंकाल और रात्रि के समय मां लक्ष्मी,गणेशजी और माता सरस्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने पर घर में धन,सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त, सामग्री लिस्ट, पूजाविधि और आरती…
31 अक्टूबर 2024 को दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त :
ब्रह्म मुहूर्त : 04 : 40 ए एम से 05:32 पीएम तक
पूजा बुकिंग
अभिजित मुहूर्त : 11:33 ए एम से 12:17 पी एम तक
विजय मुहूर्त : 01:45 पी एम से 02:29 पी एम तक
गोधूलि मुहूर्त : 05:25 पी एम से 05:51 पी एम तक
सायाह्न सन्ध्या : 05:25 पी एम से 06:43 पी एम तक
अमृत काल : 05:32 पी एम से 07:20 पी एम
निशिता मुहूर्त :11:29 पी एम से 12:21 ए एम, नवम्बर 01
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त : 31 अक्टूबर को शाम 06:27 पीएम से लेकर रात 08:32 मिनट तक लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त बन रहा है।
पूजन सामग्री : सुपारी,अक्षत,धूप,दीप,गाय का घी,पान,रोली,मौली,सरसों का तेल, श्रीयंत्र, घंटी, चंदन, कलश, घंटी, चंदन, लक्ष्मी-गणेश, पंचामृत, सिंदूर, नैवेद्य, जनेऊ, इत्र, कमल का फूल,गुलाब का फूल, नारियल, इलायची, कपूर, फल,फूलों की माला, कुमकुम, लक्ष्मी,गणेश, सरस्वती माता और कुबेर देवता की तस्वीर, लाल-पीला कपड़ा, शंख, नैवेद्य, गंगाजल, दूर्वा, सीताफल, बेर, सिंघाड़ा,गन्ना, खड़ी हल्दी, गाय का गोबर।
पूजाविधि :
सबसे पहले साफ-सफाई के बाद एक छोटी चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। इसके बाद पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करते हुए लक्ष्मी-गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। मूर्ति ऐसे रखें कि लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। चौकी के बाईं ओर जलपात्र, घंटी, धूप, तेल का दीपक रखें और दाईं ओर घी का दीपक और जल से भरा शंख रखें। लक्ष्मी-गणेशजी की प्रतिमा के समक्ष चंदन, रोली, फूल,अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें। मां लक्ष्मी जी के पास चावलों के ऊपर कलश रखें और लाल वस्त्र में नारियल बांधकर कलश पर स्थापित करें। एक घी और एक तेल का बड़ा दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी और गणेश जी को वस्त्र अर्पित करें। गणेश की ओर 16 चावल की ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। इसके बाद मूर्तियों पर गंगाजल छिड़कें। मां लक्ष्मी और गणेशजी के समक्ष दीप जलाएं। उन्हें फल,फूल,चंदन, अक्षत और चावल अर्पित करें। अनामिका उंगली से इत्र, चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी और मेंहदी लगाएं। फिर भोग सामग्री अर्पित करें। गणेश-लक्ष्मी के मंत्र, पाठ और स्तोत्र का पाठ करें। गणेशजी की आरती उतारें। मां लक्ष्मी की आरती उतारें। पूजा समाप्त होने के बाद क्षमायाचना मांगे। इसके बाद परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद वितरण करें।
मां लक्ष्मी की आरती-
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन * सेवत हरि विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
मैया जी को निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

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