नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सेना को किसी भी तरह की आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए और इसके लिए संचालन तैयारियों को हमेशा पुख्ता तथा चौकस रखने की जरूरत है।
श्री सिंह ने बुधवार को यहां सेना के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने सीमाओं की रक्षा, आतंकवाद का मुकाबला करने और जरूरत पड़ने पर प्रशासन की मदद करने में सेनाओं की भूमिका की सराहना करते हुए जोर देकर कहा कि देश की एक अरब से भी अधिक आबादी को सेना पर पूरा भरोसा है और सेना देश का सबसे विश्सनीय संगठन है। उन्होंने कहा , “ मुझे सेना और उसके नेतृतव पर पूरा भरोसा है। ”
रक्षा मंत्री ने उच्च स्तर की संचालन तैयारियों और क्षमता के लिए सेना की सराहना करते हुए कहा कि यह संतोष तथा खुशी की बात है कि सेना उद्योग जगत के साथ मिलकर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी विकसित करने के प्रयासों को तेजी से आगे बढा रही है। इससे आत्मनिर्भरता के साथ साथ स्वदेशीकरण के बल पर सैन्य आधुनिकता को बल मिलेगा।
श्री सिंह ने कहा कि सेना देश की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए हमेशा कमर कसके तैयार है।
उन्होंने कहा कि बदलती परिस्थितियों को देखते हुए हमें किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा और इसके लिए संचालन तैयारियों का हमेशा पुख्ता रहना बेहद जरूरी है।
शीर्ष सैन्य कमांडरों का पांच दिन का सम्मेलन सोमवार को शुरू हुआ था जिसमें पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य गतिरोध सहित विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सेना को सशक्त और सक्षम बनाने के बारे में भी गहन विचार विमर्श होगा।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष तथा नौसेना और वायुसेना प्रमुख भी शीर्ष सैन्य कमांडरों के समक्ष मौजूदा सुरक्षा स्थिति तथा सशस्त्र सेनाओं की जरूरतों के बारे में अपने विचार रखेंगे। इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच समन्वय तथा तालमेल बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
सेना के शीर्ष कमांडरों का सम्मेलन वर्ष में दो बार होता है और इसमें सभी प्रमुख कमांडर तथा वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हिस्सा लेते हैं। सम्मेलन में सेना से सम्बन्धित मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श के बाद महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों की रूपरेखा भी तैयार की जाती है।

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