August 14, 2026

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आराध्या बच्चन केस में हाईकोर्ट का बड़ा सवाल: क्या बच्चन परिवार का सरनेम और साख भी ‘ट्रेडमार्क’ है?

अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी आराध्या बच्चन से जुड़े फेक न्यूज मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान परिवार की पहचान, प्रतिष्ठा और सरनेम को लेकर अहम कानूनी सवाल सामने आया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या किसी परिवार के नाम और साख को ट्रेडमार्क की तरह माना जा सकता है और अगर ऐसा है तो उसका अधिकार अगली पीढ़ियों तक कितनी दूर तक जाता है?

मामला आराध्या की निजी जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ी झूठी खबरों को लेकर दायर की गई याचिका से संबंधित है। आराध्या ने 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और इंटरनेट पर उनके बारे में प्रसारित की जा रही गलत जानकारियों के खिलाफ निजता और प्रतिष्ठा की सुरक्षा की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने सरनेम को लेकर क्या सवाल पूछा?

सुनवाई के दौरान जस्टिस अनूप जे. भंभानी ने परिवार के नाम और प्रतिष्ठा को ट्रेडमार्क से जोड़ने के सवाल पर विचार किया।

कोर्ट ने इस बात पर सवाल किया कि किसी प्रोडक्ट या सेवा के नाम को ट्रेडमार्क के तौर पर संरक्षण मिल सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति या परिवार के मामले में इसकी कानूनी सीमा क्या होगी।

कोर्ट की चिंता मुख्य रूप से इस सवाल पर थी कि अगर किसी परिवार के नाम और प्रतिष्ठा को एक तरह की संरक्षित पहचान माना जाए, तो क्या यह अधिकार परिवार की अगली पीढ़ियों को भी स्वतः मिल जाएगा?

यानी मामला सिर्फ ‘बच्चन’ सरनेम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि किसी प्रसिद्ध परिवार की सार्वजनिक पहचान और प्रतिष्ठा का कानूनी संरक्षण किस हद तक किया जा सकता है।

बच्चन परिवार के वकील ने क्या दलील दी?

बच्चन परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण आनंद ने यूट्यूब पर परिवार की तस्वीरों और नाम के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई।

दलील के अनुसार, सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर परिवार के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल ऐसी झूठी खबरों के साथ किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

मामले में यह भी मुद्दा है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति या प्रसिद्ध परिवार की पहचान का इस्तेमाल कर भ्रामक और सनसनीखेज कंटेंट तैयार करने की सीमा क्या होनी चाहिए।

आराध्या के स्वास्थ्य को लेकर क्या था मामला?

आराध्या बच्चन की याचिका में उनके स्वास्थ्य और निजी जीवन से संबंधित कथित झूठी खबरों का मुद्दा उठाया गया था।

याचिका के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल 2023 में कई यूट्यूब चैनलों को आराध्या के स्वास्थ्य के संबंध में गलत और भ्रामक जानकारी प्रसारित करने से रोकने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने उस समय बच्चों के बारे में इस तरह की झूठी जानकारी फैलाने पर गंभीर चिंता जताई थी। अदालत ने यह भी माना था कि बच्चों की निजता और सम्मान की रक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।

यूट्यूब कंटेंट पर कोर्ट पहले भी सख्त

इस मामले में हाईकोर्ट की पिछली कार्यवाही ने इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर सेलिब्रिटी से जुड़ी फर्जी खबरों के प्रसार पर भी सवाल खड़े किए थे।

किसी बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर बिना आधार वाली जानकारी प्रसारित करना न सिर्फ परिवार की निजता को प्रभावित कर सकता है, बल्कि संबंधित बच्चे पर मानसिक और सामाजिक असर भी डाल सकता है।

यही वजह है कि अदालत ने पहले भी ऐसे कंटेंट को लेकर सख्त रुख अपनाया था।

अब आगे क्या होगा?

अब इस मामले में सुनवाई का एक अहम पहलू यह बन गया है कि किसी प्रसिद्ध परिवार के नाम, पहचान और प्रतिष्ठा को किस तरह कानूनी संरक्षण दिया जा सकता है।

अदालत के सामने यह भी सवाल है कि अगर परिवार की सार्वजनिक पहचान को संरक्षण दिया जाता है, तो उसका दायरा सिर्फ मौजूदा सदस्यों तक रहेगा या अगली पीढ़ियों तक भी इसका विस्तार होगा।

मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होने की बात कही गई है।

क्यों महत्वपूर्ण है आराध्या बच्चन का यह केस?

  • सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का मामला है।
  • बच्चों की निजता और प्रतिष्ठा से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल उठता है।
  • प्रसिद्ध परिवार के नाम और पहचान के कानूनी संरक्षण पर बहस हो रही है।
  • यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर भी सवाल है।
  • हाईकोर्ट की टिप्पणी भविष्य के समान मामलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

आराध्या बच्चन का यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें सिर्फ एक सेलिब्रिटी परिवार की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है, बल्कि डिजिटल दौर में निजता, प्रतिष्ठा, फेक न्यूज और पारिवारिक पहचान की कानूनी सीमा जैसे बड़े मुद्दे जुड़े हुए हैं। अब नजर सितंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी।