April 18, 2026

खबरों पर नजर हर पहर

तेज स्पीड से फैलता है RSV, आंख-नाक और मुंह से घुसकर दिखाता है ये 11 लक्षण

आप शायद आरएसवी वायरस का नाम पहली बार सुन रहे होंगे, लेकिन ये बहुत ज्यादा खतरनाक वायरस है। क्योंकि, यह बहुत तेज स्पीड से फैलता है। इस बार यह वायरस अमेरिका में काफी कोहराम मचा रहा है, जिसके बाद इसकी वैक्सीन खोजने में सभी स्वास्थ्य संस्था लग गई थी। राहत की बात यह है कि दवा निर्माता कंपनी Pfizer और GSK ने आरएसवी वायरस की पहली वैक्सीन (first RSV Virus Vaccine) बनाने का दावा किया है। जिसके जल्द ही मार्केट में आने की उम्मीद है।

लेकिन क्या है RSV Virus?
सीडीसी के मुताबिक, आरएसवी वायरस का पूरा नाम ह्यूमन रेस्पिरेटरी सीनसीटियल वायरस (Human Respiratory Syncytial Virus) है। जो कि आंख-नाक और मुंह से शरीर में घुसता है। यह सबसे पहले मरीज के फेफड़ों और सांस की नली पर अटैक करता है। जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।

मायोक्लिनिक के मुताबिक, आरएसवी वायरस (RSV) की चपेट में आने के 4 से 6 दिन बाद इसके संकेत दिखने शुरू हो जाते हैं। जिसके कारण शुरुआत में 6 आम लक्षण (common RSV Symptoms) दिखते हैं।

  1. बंद नाक या नाक बहना
  2. सूखी खांसी
  3. हल्का बुखार
  4. गले में सूजन
  5. छींक आना
  6. सिरदर्द

मायोक्लिनिक आगे बताता है कि जब रेस्पिरेटरी सीनसीटियल वायरस रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट के नीचे वाले भाग पर प्रहार करता है, तो इसके 5 गंभीर लक्षण (Respiratory Syncytial Virus Symptoms) दिखने लगते हैं। जैसे-

7. तेज बुखार

8. गंभीर खांसी

9. सांस छोड़ते हुए सीटी की आवाज आना

10. सांस लेने में तकलीफ, खासकर लेटने पर

11. शरीर में ऑक्सीजन की कमी से स्किन नीली पड़ना

Pfizer और GSK ने सबसे पहले नवजात बच्चों और 60 साल से ज्यादा बुजुर्गों के लिए आरएसवी वैक्सीन बनाने का दावा किया है। क्योंकि, यह इन दोनों को सबसे पहले चपेट में लेता है और घातक साबित हो सकता है। हालांकि, वैक्सीन को FDA से अभी अप्रूवल मिलना बाकी है। नवजात बच्चों को 2 साल की उम्र तक इसका खतरा बहुत ज्यादा होता है।

रेस्पिरेटरी सीनसीटियल वायरस (RSV Transmission) का फैलने का तरीका किसी अन्य फ्लू या कोरोनावायरस की तरह ही है। जब संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो यह वायरस के कण हवा में फैल जाते हैं। जिनके संपर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति व जगह संक्रमित हो जाती है। यह फिर स्वस्थ व्यक्ति के आंख-नाक या मुंह के द्वारा शरीर में पहुंचता है।

आरएसवी वायरस के मामले अमेरिका के टेक्सास में बहुत तेजी से बढ़ रहे थे। जिसके कारण वहां बच्चों के अस्पताल में खाली बेड नहीं मिल रहे थे। वहीं, TOI की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2022 की शुरुआत में भारत में आरएसवी वायरस के केस (RSV cases in India) में बढ़ोतरी देखी गई थी। चेन्नई में कई बच्चों में आरएसवी वायरस के लक्षण देखने को मिले थे। हालांकि, राहत की बात यह थी कि अधिकतर बच्चे 2 हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो गए थे।

सीडीसी के मुताबिक, आरएसवी वायरस का कोई पुख्ता इलाज नहीं है। इसके लक्षणों को खत्म करने के लिए सपोर्टिव केयर दी जाती है। जिसमें एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल दवाओं का सेवन, आईवी फ्लूइड, ह्यूमिडिफाइड ऑक्सीजन आदि शामिल हैं। हालांकि, कुछ एहतियात बरतकर आरएसवी वायरस से बचाव किया जा सकता है।

  1. साबुन से हाथों को अच्छी तरह और कई बार धोएं।
  2. अपने मुंह और नाक को मास्क से कवर रखें।
  3. आसपास की जगहों को साबुन के पानी से साफ करें।
  4. स्मोकिंग ना करें।
  5. बच्चों के खिलौने अच्छी तरह साफ करें।
  6. बच्चों को बीमार व्यक्ति के पास ना जाने दें। आदि

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।