इस प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा काम्बोज ने कहा कि भारत यूक्रेन में हाल के घटनाक्रम से बहुत परेशान है और नई दिल्ली ने हमेशा इस बात की वकालत की है कि मानव जीवन की कीमत पर कोई समाधान कभी नहीं आ सकता है। भारत की ओर से रुचिरा काम्बोज ने कहा कि “हम आग्रह करते हैं कि हिंसा और शत्रुता को तुरंत खत्म करने के लिए सभी पक्षों द्वारा प्रयास किए जाएं। मतभेदों और विवादों को निपटाने के लिए संवाद ही एकमात्र जवाब है, चाहे वह इस समय कितना भी कठिन क्यों न हो। शांति के मार्ग के लिए हमें कूटनीति के सभी दरवाजों को खुला रखने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की सहित दुनिया भर के नेताओं के साथ चर्चा में इसके बारे में अवगत कराया है।संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि किसी भी रूस ने यूक्रेन के 4 प्रांतों का अपने देश में विलय करके संयुक्त राष्ट्र चार्टर व अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। यह कदम खतरनाक है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इसके कारण शांति की संभावनाएं खतरे में पड़ जाएंगी। यह संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाता है, आधुनिक दुनिया में इसका कोई भी स्थान नहीं है।

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