मानसून ने हर व्यक्ति को राहत दी, लेकिन अनाज से लेकर सब्जियों के दाम ऐसे बढ़े हैं कि हर परिवार को इनकी कीमतों ने आटे-दाल का भाव याद दिला दिया है। कुछ खाद्य सामग्री और मसालों के रेट में वृद्धि आश्चर्यजनक ढंग से हुई है।
जैसे, जीरा पिछले महीने की शुरुआत में 250 से 300 रुपए किलो तक बिक रहा था, लेकिन अभी 700 से 750 रुपए किलो हो गया है। छत्तीसगढ़ में टमाटर की सप्लाई डिमांड से चौथाई है, इसलिए इसकी कीमत बढ़कर 120 रुपए किलो पहुंच गई है। प्रदेश की सबसे बड़ी रिटेल सब्जी मंडी यानी शास्त्री बाजार में एक माह पहले हरा धनिया 60 से 80 रुपए किलो बिक रहा था, जो अब 200 रुपए किलो हो गया है।
150 रुपए किलो में मिलने वाला अदरक अभी 320 रुपए किलो बिक रहा है। जहां तक अनाज-किराना का सवाल है, दालों की महंगाई बेहद परेशान करनेवाली है। शहर में अरहर से लेकर मसूर तक, लगभग हर दाल की कीमत 50 से 60 रुपए किलो बढ़ गई है। आटे और चावल का रेट भी 5-5 रुपए किलो तक तेज हुआ है।
छत्तीसगढ़ में चावल की कीमत में मामूली वृद्धि-कमी होती थी, लेकिन इस बार अप्रत्याशित है। एक माह में एचएमटी समेत कई ब्रांड के चावल की कीमत 5-6 रुपए किलो तक बढ़ गई है। गेहूं महंगा हुआ है, इसलिए लोकल पिसे हुए आटे का रेट 5 रुपए किलो तक बढ़ गया है। ब्रांडेड आटे के भाव में 8 रुपए किलो तक का इजाफा है। गेहूं की कीमत पिछले 40 रुपए किलो तक ही थी, लेकिन अभी कई ब्रांड ऐसे हैं, जो 50 रुपए किलो में भी बिक रहे हैं।
जिले के बड़े सब्जी कारोबारियों का कहना है कि गर्मी में सभी बाड़ी वाले बाड़ियों को सूखने छोड़ देते हैं ताकि कीट वगैरह खत्म हो जाएं। नई फसल मानसून में लगाई जाती है। इस बार मानसून लेट से आया है। इस वजह से लोकल बाड़ी की सब्जियां अगस्त के पहले या दूसरे हफ्ते तक ही बाजार में पहुंच पाएंगी। इस वजह से इस पूरे महीने सब्जियों की कीमत बढ़ी ही रहेगी। छत्तीसगढ़ में ज्यादातर सब्जियां महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश से ही आती है। अभी वहां भी फसल बेहद खराब है। इस वजह से सप्लाई सामान्य नहीं हो रही है।
आलू-प्याज चिल्हर में महंगा
“आलू-प्याज की फसल अच्छी नहीं होने से रेट बढ़ा है। हालांकि थोक में रेट ज्यादा नहीं है पर चिल्हर बाजार में भाव रोजाना बढ़ रहे हैं।”
– अजय अग्रवाल, अध्यक्ष, आल्ू-प्याज संघ
महंगाई अभी झेलनी होगी
“बारिश में फसलें खराब और इससे सप्लाई में कमी के कारण रेट बढ़ा है। बाजार में कहीं भी कालाबाजारी-मुनाफाखोरी होने नहीं दे रहे हैं।”
– अमर पारवानी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ चैंबर
लोकल सब्जी अगस्त में ही
“दूसरे राज्यों से सब्जियों की आवक कम है। छत्तीसगढ़ की लोकल सब्जी अगस्त में ही आएगी। तब तक सब्जी की कीमत कम नहीं होगी।”
– टी श्रीनिवास रेड्डी, अध्यक्ष,थोक सब्जी मंडी
जीरे पर मौसम का असर
“देशभर में जीरे की फसल बर्बाद हो गई। दाल, चावल पर ट्रांसपोर्टिंग-मौसम दोनों का असर हुआ। अभी कीमत कहीं भी कम नहीं होगी।”

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