June 11, 2026

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घरेलू धुएं से निकलने वाली जहरीली गैसों को रोकने के लिए बनाएंगे यंत्र

रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रो. डा. शम्स परवेज प्रदूषण आकलन के बाद अब घरों से निकलने वाले धुएं पर पाई जाने वाली जहरीली गैसों को रोकने के लिए डिवाइस (यंत्र) बनाएंगे। इसके लिए डा. परवेज को साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड केंद्र सरकार की तरफ से 80 लाख रुपये की ग्रांट मंजूर हो गई है।

घर में गोबर के कंडे, लकड़ी, कोयला के लड्डू, कृषि वेस्ट जलाने से वेंजोपायरिन, नाइट्रेट, सल्फेट, क्लोराइड के साथ-साथ वोलाटाइल आर्गेनिक कार्बन, सल्फर, नाइट्रोजन डाइआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाइआक्साइड जैसी गैसें बड़ी मात्रा में निकलती हैं। इनसे न केवल वायु प्रदूषण होता है, बल्कि स्थानीय जलवायु परिवर्तन में 30 प्रतिशत तक इनकी सहभागिता होती है। धुएं से निकलने वाली जहरीली गैसों को खत्म करने के लिए डिवाइस बनाने पर काम किया जाएगा। धुएं में ठोस कणों को रोकने के लिए बहुत सारे डिवाइस बने हैं, लेकिन गैसों को रोकने के लिए कोई विधि नहीं है।

अलग-अलग रसायन का प्रयोग करके करेंगे शोध

डा. परवेज ने बताया कि घरेलू धुएं से जो जहरीली गैसें निकलती हैं, उन्हें अलग-अलग रासायनिक अवयवों का उपयोग कर कम करने की कोशिश की जाएगी। सबसे ज्यादा वेंजोपायरियन गोबर के कंडे जलने से निकलती है। इससे कैंसर होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। नाइट्रेट, सल्फेट, क्लोराइड जैसे जहरीले आयन भी बड़ी मात्रा में निकलते हैं। कार्बन फाइबर पर आधारित सक्रिय नैनो मटेरियल में इन जहरीली गैसों को अवशोषित करने के गुण होते हैं। ऐसे कार्बन फाइबर मटेरियल तैयार किए जाएंगे और उनसे कितने प्रतिशत जहरीली गैसों को दूर किया जा सकता है, इस पर अध्ययन करेंगे। इससे यदि जहरीली गैसें दूर होती हैं तो गैस रिमूवल डिवाइस बनाई जा सकती है।

शोध के लिए ऐसा माडल बनाएंगे

शोध के लिए एक माडल बनाया जाएगा। माडल में नीचे सिगड़ी जलाई जाएगी। सिगड़ी से निकलने वाले धुएं को चिमनी के जरिए अवशोषित करेंगे। धुआं गर्म होने के कारण इसे ठंडा करने के लिए यंत्र लगाया जाएगा। इसके बाद धुएं में पाई जाने वाली अलग-अलग जहरीली गैसों के अनुपात की जांच करेंगे। इसके बाद धुआं बनाई गई डिवाइस से गुजरेगा। डिवाइस से निकलने के बाद धुएं में जहरीली गैसों के अनुपात को फिर से जांचा जाएगा।

तीन साल के लिए प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट तीन साल के लिए मिला है। इस साल में प्रदेश के अलग-अलग इलाको में घरेलू कुकिंग, कुक स्टोव में इस्तेमाल होने वाले ठोस ईंधन के प्रकार का अध्ययन कर उनसे प्रति किलोग्राम दहन में निकलने वाली जहरीली गैसों की सांद्रता ज्ञात की जाएगी। इसके बाद वास्तविक परिस्थिति क्रिएट कर धुएं से निकलने वाली गैसों को दूर करने पर शोध कर गैस रिमूवल डिवाइस बनाएंगे। इससे जहरीली गैसों को वायुमंडल में पहुंचने से रोका जा सकेगा। शोध में डा. इंद्रपाल करभाल सहायक अन्वेषक की भूमिका निभाएंगे।