June 11, 2026

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छत्तीसगढ़ के कोरिया में मारे गए थे अंतिम 3 चीते

अंबिकापुर. देश में 70 साल बाद चीतों की वापसी हो रही है। नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में रखे जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर यह जीते लाए जा रहे हैं। कभी चीतों का घर रहे भारत में आजादी के वक्त ही चीते पूरी तरह विलुप्त हो गए। 1947-48 में देश के आखिरी तीन चीतों का शिकार मध्य प्रदेश के कोरिया रिसासत (अब छत्तीसगढ़) के महाराजा रामानुज प्रताप ने किया था। 1952 में भारत में चीतों को विलुप्त वन्य जीव घोषित कर दिया था।

अब 70 साल बाद इंतजार की घड़ियां खत्म होने वाली है। देश की धरती पर एक बार चीता अपनी दस्तक दे देगा। ऐसा बताया जाता है कि 1947-48 में छत्तीसगढ़ के कोरिया रियासत के महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने देश के आखिरी 3 एशियाई चीतों का शिकार किया था। इसके बाद से भारत में एशियाई चीतों को कभी नहीं देखा गया था। जानकारी के अनुसार महाराज रामानुज प्रताप सिंहदेव शिकार के बेहद शौकीन थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में बाघ, तेंदुए, हिरण, चीता, बारहसिंगा जैसे अनेक जानवरों का शिकार किया, जिसकी गवाही आज भी रामानुज पैलेस की दीवारों पर टंगे सिर देते हैं।

आपको बता दें की 1948 में रामानुज प्रताप सिंहदेव बैकुंठपुर से लगे एक गांव के समीप जंगल में शिकार करने गए थे। ग्रामीणों ने जंगली जानवर के हमले की बात कही थी और मदद की गुहार लगाई थी। ग्रामीणों ने आदमखोर जंगली जानवर की शिकायत रामानुज प्रताप सिंहदेव से की थी। जिसके बाद महाराज शिकार के लिए निकल पड़े और उन्होंने एक साथ तीन चीतों का मार गिराया। शिकार किए गए तीनों नर चीते थे और पूरी तरह वयस्क भी नहीं हुए थे। परंपरा के मुताबिक महाराज ने तीनों मृत चीतों के साथ बंदूक लिए फोटो खिंचाई। ऐसा माना जाता है कि यह 3 चीते भारत के आखिरी एशियाई चीते थे और उसके बाद भारत में कभी एशियाई चीते नहीं देखे गए। वहीं भारत में चीतों की दोबारा वापसी हो रही है, तब अचानक से महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव के भारत के आखिरी चीतों के शिकार की बात फिर सुर्खियों में है।