May 4, 2026

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हाट-बाजार क्लीनिक ने बनाया रिकॉर्ड, 51 लाख लोगों का हुआ मुफ्त इलाज

फीचर स्टोरी। छत्तीसगढ़ में बीते कुछ वर्षों में कई योजनाओं की शुरुआत हुई. योजनाओं का सफल क्रियान्वयन भी धरातल पर हुआ है. राज्य के साथ राज्य के बाहर भी राज्य की योजनाओं को खूब सराहा गया. केंद्र सरकार की ओर भी योजनाओं में बेहतर काम करने के लिए सम्मान मिला है. यही वजह है कि राज्य की कई योजनाओं को दूसरे राज्यों ने भी अपनाया है. और आज छत्तीसगढ़ एक मॉडल राज्य के रूप में उभरकर सामने आया है.

राज्य सरकार की कई कल्याकारी योजनाओं की जब बात होती है, तो एक योजना की चर्चा भी खूब होती है. योजना का नाम है- ‘मुखयमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना’. इस योजना की शुरुआत अक्टूबर 2019 में भूपेश बघेल ने बस्तर संभाग से की थी. आज इस योजना का विस्तार पूरे छत्तीसगढ़ में हो चुका है. शुरुआती दौर में इसे वनांचल तक सीमित रखा गया था, लेकिन योजना की सफलता को देखते हुए इसे मैदानी इलाकों में लागू किया गया.

भूपेश सरकार की यह योजना ग्रामीणों के लिए एक वरदान की तरह है. विशेषकर दुरस्त और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए. क्योंकि सभी जगहों पर अस्पताल संभव नहीं है, लेकिन अस्पताल की ही एक छोटी इकाई को हाट-बाजार में पहुँचाकर आम लोगों को लाभ पहुँचाने का जो काम किया गया है, वह सराहनीय रहा है.

इसी का परिणाम है कि इस योजना ने एक रिकॉर्ड बना दिया है. तीन वर्ष में इस योजना से 51 लाख लोग लाभांवित हो चुके हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए आँकड़े बताते हैं कि प्रदेश भर में अब तक 1 लाख 11 हजार हाट-बाजार क्लीनिक का आयोजन किया जा चुका है. अब तक प्रदेश के 1824 स्थानों में हाट-बाजारों में क्लीनिक लगाया है और कुल 1 लाख 10 हजार 988 शिविर का आयोजन हो चुका है. शिविर के साथ-साथ योजना के अंतर्गत राज्य में 425 डेडिकेटेड ब्राडिंग वाहन तथा चिकित्सा दलों के माध्यम से भी दूरस्थ अंचलों में लोगों का इलाज किया जा रहा है. मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिकों के माध्यम से अब तक बालोद जिले में 2 लाख 52 हजार 66, बलौदाबाजार-भाटापारा में 1 लाख 15 हजार 998, बलरामपुर-रामानुजगंज में 1 लाख 24 हजार 238, बस्तर में 1 लाख 28 हजार 82, बेमेतरा में 3 लाख 5 हजार 816, बीजापुर में 1 लाख 18 हजार 356, बिलासपुर में 2 लाख 82 हजार 338, दंतेवाड़ा में 1 लाख 11 हजार 616, धमतरी में 46 हजार 365, दुर्ग में 1 लाख 71 हजार 509, गरियाबंद में 2 लाख 19 हजार 597, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 88 हजार 741, जांजगीर-चांपा में 2 लाख 24 हजार 573 और जशपुर में 2 लाख 50 हजार 951 लोगों का इलाज किया गया है. इसी तरह कबीरधाम में 1 लाख 97 हजार 651, कांकेर में 1 लाख 84 हजार 572, कोंडागांव में 1 लाख 8 हजार 525, कोरबा में 1 लाख 42 हजार 801, कोरिया में 1 लाख 27 हजार 848, महासमुंद में 2 लाख 92 हजार 645 मुंगेली में 1 लाख 11 हजार 804, नारायणपुर में 47 हजार 150, रायगढ़ में 4 लाख 89 हजार 733, रायपुर में 1 लाख 38 हजार 38, राजनांदगांव में 3 लाख 6 हजार 9, सुकमा में 57 हजार 737, सूरजपुर में 3 लाख 17 हजार 113 तथा सरगुजा जिले में 1 लाख 53 हजार 260 लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है.

हाट-बाजार क्लीनिकों में पर पूरी तरह लोगों का निःशुल्क उपचार किया जाता है. उनसे किसी भी तरह की कोई भी फीस नहीं ली जाती है. उपचार के साथ ही उन्हें दवाइयाँ भी मुफ्त में दी जाती है. विभागीय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक हाट-बाजार क्लीनिकों में ओ.पी.डी. आधारित आठ प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. जांच के बाद व्याधिग्रस्त पाए गए लोगों को निःशुल्क दवाईयां भी दी जाती हैं. जिन मरीज़ों को उच्च स्तरीय जाँच अथवा उपचार की आवश्यकता होती है उन मरीजों को हाट-बाजार क्लीनिक से सीधे स्वास्थ्य केंद्र में रिफर भी किया जा रहा है जिससे उनका सम्पूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा सके.

वही मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा मलेरिया, एचआईव्ही, मधुमेह, एनिमिया, टीबी, कुष्ठ रोग, उच्च रक्तचाप और नेत्र विकारों की जांच भी की जा रही ह. इन क्लीनिकों में शिशुओं और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी किया जा रहा है. योजना के तहत 51 लाख लोगों ने शिविर का लाभ लिया है. शिविरों में लाभ लेने वाले लोगों में में उच्च रक्तचाप के 12 लाख 51 हजार 20, मधुमेह के 10 लाख 54 हजार 717, मलेरिया के 4 लाख 9 हजार 439, एनीमिया के 2 लाख 76 हजार 727, नेत्र संबंधी 1 लाख 614 शामिल हैं. इसी तरह 39 हजार 699 लोगों की टीबी, 15 हजार 631 लोगों की कुष्ठ और 30 हजार 147 लोगों की एचआईव्ही जांच भी की गई है. इस दौरान 75 हजार 978 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच भी की गई है. हाट-बाजारों में आयोजित क्लीनिकों में एक लाख 33 हजार 829 डायरिया पीड़ितों का भी उपचार किया गया है. गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के नारे के साथ राज्य में हर क्षेत्र को मजबूत करने जुटी भूपेश सरकार को स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है.

विशेषकर बस्तर और सरगुजा से वनांचल क्षेत्रों में इस योजना से स्वास्थ्य सेवाओं को गति मिली है. दुर्गम-पहाड़ी और घने जंगलों के बीच रहने वाले आदिवासियों का स्वास्थ्य अब पहले से कहीं बेहतर हुआ है. क्योंकि समय पर जांच और इलाज होने से असमय मृत्यु का आँकड़ा घटा है. वहीं सरकार को भी इससे यह जानकारी सुलभ हो सकी है कि किन क्षेत्रों में किस तरह की बीमिरियाँ अधिक और कैसे उसके रोकथाम के उपाय किए जा सकते हैं. कहा जा सकता है कि जिस उद्देश्य के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाट-बाजार क्लीनिक योजना की शुरुआत की थी वह कारगर रही है. यह योजना पूरी तरह से ग्रामीणों के बीच असरकारी साबित हुई है.