September 2, 2026

खबरों पर नजर हर पहर

CM साय का बड़ा बयान: ‘हिड़मा को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली’, बोले- हिंसा के महिमामंडन को समाज करे खारिज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हिंसा की विचारधारा और नक्सली गतिविधियों के समर्थन को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुख्यात नक्सली हिड़मा जैसे लोगों को आदर्श मानने और नक्सलवाद का समर्थन करने वाली मानसिकता को भी समाज के लिए गंभीर खतरा माना जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक के दम पर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी भी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। उन्होंने हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली सोच को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करने की अपील की।

‘हिड़मा को आदर्श मानना मानसिकता की समस्या’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कुछ लोग ऐसे नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिन पर निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों की हत्या से जुड़े गंभीर आरोप रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच केवल नक्सली हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंसा को सही ठहराने वाली मानसिकता को भी बढ़ावा देती है।

मुख्यमंत्री के अनुसार लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन निर्दोष लोगों की हत्या और हिंसा का समर्थन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री के बयान की प्रमुख बातें
नक्सली हिंसा का समर्थन करने वाली सोच को खारिज करने की जरूरत।
हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन स्वीकार्य नहीं।
बस्तर को भय और हिंसा से निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर।
युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर बढ़ाने की प्राथमिकता।
‘बस्तर ने हिंसा के कारण बहुत कुछ खोया’

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के लंबे दौर में बस्तर ने बड़ी मानवीय कीमत चुकाई है। इस दौरान आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सुरक्षाबलों के जवानों ने अपनी जान गंवाई। अनेक परिवारों ने अपनों को खोया और कई बच्चों से उनके माता-पिता दूर हो गए।

उन्होंने कहा कि हिंसा के कारण क्षेत्र के विकास पर भी लंबे समय तक असर पड़ा। ऐसे में हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों का महिमामंडन करना उन परिवारों के दर्द और शहीद जवानों के बलिदान को नजरअंदाज करने जैसा है।

बस्तर में बदल रही है तस्वीर

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बस्तर अब धीरे-धीरे भय और हिंसा की पहचान से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सली हिंसा और बारूदी सुरंगों का डर रहता था, वहां अब विकास कार्यों को गति मिल रही है। स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी योजनाओं की पहुंच दूरस्थ इलाकों तक बढ़ रही है।

युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने पर भी सरकार का जोर है।

‘बस्तर के युवा बंदूक नहीं, किताब चाहते हैं’

CM साय ने कहा कि बस्तर की नई पीढ़ी अब हिंसा का रास्ता नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल और रोजगार का रास्ता चुनना चाहती है। युवा अपने भविष्य के सपनों को पूरा करना चाहते हैं और देश-प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि बस्तर के युवाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।

नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को बताया भविष्य की लड़ाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की लड़ाई नहीं थी। यह बस्तर के भविष्य और वहां की नई पीढ़ी को हिंसा के प्रभाव से बाहर निकालने की लड़ाई भी थी।

उन्होंने सुरक्षाबलों के जवानों के साहस और बलिदान को याद करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को निर्णायक दिशा में ले जाने में सुरक्षा बलों की बड़ी भूमिका रही है।

शांति के बाद विकास पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद अब इस शांति को स्थायी बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके साथ ही पर्यटन, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में विकास को गति देने पर जोर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि नए छत्तीसगढ़ में हिंसा और नक्सलवाद के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श ऐसे लोग होने चाहिए, जो शिक्षा, सेवा, मेहनत, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे ले जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के इस बयान ने एक बार फिर नक्सलवाद के खिलाफ केवल सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि हिंसा के वैचारिक महिमामंडन को रोकने की जरूरत पर बहस को सामने ला दिया है।