August 31, 2026

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सागौन तस्करी का बड़ा खुलासा! ओडिशा में USTR की छापेमारी, 2 साल पहले जब्त लकड़ी फिर मिली तो मचा हड़कंप

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ और ओडिशा सीमा पर सागौन तस्करी के कथित अंतर्राज्यीय नेटवर्क के खिलाफ उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने बड़ी कार्रवाई की है। USTR की टीम ने ओडिशा पुलिस और नबरंगपुर वन विभाग के साथ मिलकर 24 अगस्त को ओडिशा के दसपुर गांव में संयुक्त एंटी-स्मगलिंग ऑपरेशन चलाया।

कार्रवाई के दौरान करीब 3 घन मीटर चिरान बरामद की गई। इस बरामदगी ने जांच एजेंसियों को इसलिए चौंका दिया क्योंकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक बरामद इमारती लकड़ी का एक हिस्सा करीब दो साल पहले भी जब्त किया जा चुका था।

अब वन विभाग इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुट गया है।

दो साल पहले जब्त लकड़ी फिर कैसे पहुंची?

USTR के उपनिदेशक वरुण जैन के मुताबिक दसपुर क्षेत्र में पिछले करीब डेढ़ वर्ष के दौरान दो बड़े ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इन कार्रवाइयों में करीब 30 आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

उनके अनुसार, पहले की कार्रवाई में जब्त की गई सामग्री रायघर रेंज को सुपुर्द की गई थी। हालांकि, बार-बार पत्राचार किए जाने के बावजूद सीजर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात सामने आई है।

24 अगस्त की कार्रवाई के दौरान मिली कुछ प्रारंभिक और अपुष्ट जानकारी में यह संकेत मिला कि बरामद लकड़ी पहले भी जब्त की जा चुकी थी।

मामले की पुष्टि के लिए रायघर वन अधिकारियों से जानकारी मांगी गई है। अब पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा बरामदगी से जुड़े सीजर दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।

जांच के प्रमुख बिंदु:

करीब 3 घन मीटर चिरान बरामद।
लकड़ी के पहले भी जब्त किए जाने की सूचना।
पिछले डेढ़ साल में क्षेत्र में दो बड़े ऑपरेशन।
पूर्व कार्रवाई में करीब 30 गिरफ्तारियां।
पुराने सीजर रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई।
अंतर्राज्यीय तस्करी नेटवर्क की संभावित कड़ियों की जांच जारी।
खुफिया इनपुट पर बनाई गई थी रणनीति

वन विभाग को रायघर फॉरेस्ट रेंज में अवैध सागौन के भंडारण और तस्करी से संबंधित खुफिया जानकारी मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर USTR ने ओडिशा के नबरंगपुर जिले के रायघर रेंज अंतर्गत दसपुर गांव में कार्रवाई की योजना तैयार की।

इस ऑपरेशन में दोनों राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय देखने को मिला। अधिकारियों ने संदिग्ध स्थानों की पहचान के बाद व्यवस्थित तरीके से तलाशी अभियान चलाया।

थर्मल ड्रोन ने दिखाई छिपी लकड़ी की लोकेशन

इस कार्रवाई में आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया। USTR की टीम ने सुबह करीब 10 बजे ऑपरेशनल क्षेत्र में पहुंचकर कार्रवाई की तैयारी शुरू की।

ओडिशा वन अधिकारियों द्वारा सर्च वारंट की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद करीब 12:30 बजे व्यवस्थित तलाशी अभियान शुरू किया गया।

संदिग्ध परिसरों में प्रवेश से पहले टीम ने थर्मल इमेजिंग ड्रोन के जरिए इलाके की हवाई निगरानी की। इससे संभावित लकड़ी भंडारण वाले स्थानों की पहचान और मैपिंग की गई।

इस तकनीक की मदद से टीम ने पूरे इलाके में बिना उद्देश्य तलाशी लेने के बजाय संदिग्ध स्थानों को चिन्हित कर लक्षित सर्च किया।

डॉग स्क्वायड की टीना ने भी निभाई अहम भूमिका

ऑपरेशन में USTR के डॉग स्क्वायड को भी शामिल किया गया था। टीम की डॉग टीना ने संदिग्ध स्थानों पर छिपाकर रखी गई लकड़ी की तलाश में मदद की।

तकनीकी निगरानी और डॉग स्क्वायड के इस्तेमाल से तलाशी अभियान को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया।

तीन संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी

खुफिया और सर्विलांस इनपुट के आधार पर टीम ने तीन संदिग्ध व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली।

इनमें कृष्णकांत हल्दार उर्फ किशनो हल्दार, पिता महेंद्र हल्दार का नाम सामने आया है। वह फिलहाल फरार बताया गया है और उसके परिसर में धारा 35(3) BNSS का नोटिस चस्पा किया गया है।

दूसरा नाम अखिल सरकार, पिता अश्वनी सरकार का है। वह बिजली विभाग में लाइनमैन बताया गया है और उसके भी फरार होने की जानकारी दी गई है।

तीसरे व्यक्ति नागेन तालुकदार, पिता चित्तरंजन तालुकदार को धारा 35(3) BNSS के तहत नोटिस तामील किया गया है।

बड़ी मात्रा में इमारती लकड़ी बरामद

तीनों संदिग्धों से जुड़े परिसरों की तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में इमारती लकड़ी मिलने की जानकारी सामने आई है। वन विभाग अब बरामद लकड़ी की प्रकृति, मात्रा और उसके स्रोत से जुड़े तथ्यों की जांच कर रहा है।

सबसे अहम सवाल यह है कि यदि बरामद लकड़ी का कोई हिस्सा पहले जब्त किया गया था, तो वह दोबारा संबंधित क्षेत्र में कैसे पहुंचा।

इसी बिंदु पर पुराने रिकॉर्ड, सीजर रिपोर्ट और मौजूदा कार्रवाई के दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।

अंतर्राज्यीय नेटवर्क की कड़ियों की तलाश

USTR की शुरुआती जांच में रायघर रेंज में कथित अनियमितताओं और अंतर्राज्यीय लकड़ी तस्करी नेटवर्क के बीच संभावित संबंधों के संकेत मिलने की बात कही गई है।

हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा जानकारी की पूरी तरह पुष्टि और दस्तावेजों के मिलान के बाद ही मामले में अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

फिलहाल USTR ने जांच आगे बढ़ा दी है। जांच का फोकस बरामद लकड़ी के स्रोत, पुराने जब्ती रिकॉर्ड, सीजर रिपोर्ट और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों तक पहुंचने पर है।

दसपुर में हुई इस कार्रवाई ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं—पुरानी जब्त लकड़ी दोबारा कैसे मिली, सीजर रिपोर्ट क्यों उपलब्ध नहीं हुई और क्या इसके पीछे कोई बड़ा अंतर्राज्यीय नेटवर्क सक्रिय है? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।