दिन-रात जारी तस्करी, महासमुंद से ओडिशा तक फैला तस्करों का नेटवर्क..
तस्कर मवेशियों को हांकते हुए सैकड़ों किलोमीटर ओडिशा की ओर ले जा रहे…
महासमुंद- सरायपाली :
महासमुंद जिले की छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर स्थित सिरपुर – राजाडीह बॉर्डर अब मवेशी तस्करों का सबसे सुरक्षित कॉरिडोर बन चुका है। प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बावजूद तस्कर बेलगाम होकर गौवंश की तस्करी कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह तस्करी अब न तो सिर्फ रात तक सीमित है, न ही छिपकर हो रही है। दिन के उजाले में भी तस्कर धड़ल्ले से मवेशियों को हांकते हुए सैकड़ों किलोमीटर ओडिशा की ओर ले जा रहे हैं।

स्थानीय सूत्रों और गौ-रक्षकों के अनुसार तस्करों ने एक पूरा रूट तैयार कर लिया है। बिलाईगढ़ से गिरसा, सागरपाली होते हुए भूथिया , सरायपाली के रास्ते मवेशियों को इकट्ठा कर सीधे गाँव गाँव होते हुए बॉर्डर पार कर ओडिशा ले जाया जा रहा है। इस रूट पर पुलिस की मौजूदगी कम होने और जंगली रास्तों की वजह से तस्करों को आसानी हो रही है।
तस्कर ट्रक, पिकअप और छोटे वाहनों में क्रूरता से मवेशियों को ठूंस-ठूंस कर भर कर तस्करी को अंजाम दे रहे है। कई बार बीमार और घायल गौवंश भी इसी तरह ले जाए जाते हैं।

आपको बता दें कि महासमुंद, पिथौरा, बसना और सांकरा क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन ने बीते कुछ हफ्तों महीनों में कई बार बड़ी बड़ी कार्रवाई की है। दर्जनों वाहनों को जब्त कर तस्करों पर केस दर्ज किए गए हैं। लेकिन कार्रवाई के बाद भी तस्करी नहीं रुकी। जानकारों का मानना है कि एक तरफ सख्ती बढ़ने से तस्कर अपना रूट बदलकर सिरपुर – राजाडीह जैसे कमजोर बॉर्डर का इस्तेमाल करने लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों और गौ-सेवा से जुड़े लोगों में भारी आक्रोश..
उनका कहना है कि बॉर्डर पर न तो पर्याप्त चेकिंग पॉइंट हैं, न ही रात में गश्त। तस्कर स्थानीय लोगों की मिलीभगत से पुलिस को चकमा दे देते हैं। कई बार सूचना देने के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
गौ-रक्षक कमलेश डड़सेना का कहना है कि-
जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से मांग की जाएगी कि सिरपुर – राजाडीह बॉर्डर पर 24 घंटे नाकाबंदी की जाए, ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और अंतरराज्यीय संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया जाए। उनका कहना है कि जब तक बॉर्डर पर स्थायी बैरियर और सख्त निगरानी नहीं होगी, तब तक तस्करी नहीं रुकेगी।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। जल्द ही ओडिशा पुलिस के साथ समन्वय कर संयुक्त गश्त और नाकाबंदी की जाएगी। साथ ही मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया जाएगा।
फिलहाल सवाल यही है कि जब महासमुंद के अन्य क्षेत्रों में कार्रवाई तेज है, तो सिरपुर – राजाडीह बॉर्डर तस्करों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर क्यों बन गया है?
जब तक इस पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, गौवंश की तस्करी ऐसे ही जारी रहने का अंदेशा है।

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